भारत में नारी के सशक्तीकरण के लिए नारों की भरमार है। नारी का दिल बहलाने के लिए जहां एक तरफ मनु स्मृति के माध्यम से नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाता है कि जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं वहीं दूसरी तरफ जगतगुरु शंकराचार्य की नसीहत है, “नारी नरकस्य द्वारम” नारी नरक का दरवाजा है। क्या इस लिए ही नारी को शिक्षा नहीं देना चाहिए कि वह जगतगुरु शंकराचार्य की दृष्टि में नरक का दरवाजा है?जगतगुरु शंकराचार्य की पुनः नसीहत है,”स्त्री शुद्रो विद्यानाधियताम”। अर्थात नारी और शुद्रों को शिक्षा न दिया जाय। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि जो शिक्षित है वही सुरक्षित है। सावित्री बाई फुले ने अज्ञान को अपना सबसे बड़ा शत्रु माना। इस लिए उन्होंने उस शत्रु के समूल विनाश के लिए भारत में शिक्षा से वंचित शुद्रों और महिलाओं के लिए सन् १९४८ में प्रथम पाठशाला खोलने का गौरव प्राप्त किया। हमारी सरकार नारी सशक्तिकरण के लिए बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ का एक तरफ नारा देती है तो वहीं सरकार दूसरी तरफ नयी अपनी शिक्षा नीति के तहत स्कूलों को बन्द करने का मुहिम चला रखा है। हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार पिछले दशक वर्षों में ८९४४१ प्राइमरी स्कूलों को बन्द कर दिया गया। इसमें २९४१० मध्यप्रदेश और २५१३६ स्कूल सिर्फ दो राज्यों से हैं। ८% सरकारी स्कूल कम हुए और इसके विपरित १४% प्राइवेट स्कूलों में वृद्धि हुई है। यह मूल निवासी बेटे और बेटियों को शिक्षा से वंचित करने का षड्यंत्र दर्शाता है।बेटी बचाओ का नारा किसके लिए। क्या देशवासी अपनी बहन-बेटियों को घर में छुपा कर रखें जिससे उनकी आबरू बच सके? सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं। जिस देश की राष्ट्रपति महिला हो, फिर भी नारी सुरक्षित नहीं। महिला आरक्षण विधेयक से क्या भारत की मूलनिवासी महिलाएं भी सुरक्षित एवं सशक्त हो सकेंगी। महिला आरक्षण विधेयक का नाम “नारी शक्ति बन्दन विधेयक”रख देने से क्या नारी सशक्त हो जायेगी? हकीकतन यह सब महिलाओं का दिल बहलाने का शासक जातियों का बौद्धिक षड्यंत्र है जिसे समझाने के लिए ही पीपुल्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (डेमोक्रेटिक)और मूल निवासी संघ पूरे देश में संयुक्त रूप से क्रांति ज्योति सावित्री बाई फुले की जयंती ३ जनवरी २०२६ को मनाने का निर्णय लिया है जिसमें सभी भाई और बहनों की उपस्थिति प्रार्थनीय है। सावित्री बाई फुले की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन!
निवेदक
दयाराम
राष्ट्रीय अध्यक्ष पीपीआई (डी)
एवं
पंकज रवि
राष्ट्रीय अध्यक्ष मूल निवासी संघ।

