गुजरात भीमा-कोरेगांव शौर्य–विजय दिवस 208वाँ के कार्यक्रम का आयोजन गांधीधाम, जिला कच्छ-गुजरात में दिनांक 1 जनवरी 2026 को अत्यंत उत्साह, वीरतापूर्ण वातावरण एवं शौर्य भाव के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन मूलनिवासी संघ, कच्छ जिला यूनिट द्वारा किया गया, जिसका नेतृत्व मूल. मनोज कूड़ेचा (कन्वीनर) ने किया। समापन अवसर पर मूल. नाराण बी. गरवा, सदस्य मूलनिवासी संघ द्वारा ओजस्वी समापन वक्तव्य दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बामसेफ एवं मूलनिवासी संघ की जिला कार्यकारिणी समिति द्वारा बोधिसत्व बाबासाहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पण कर की गई। इस अवसर पर वीरतापूर्ण नारों से संपूर्ण परिसर गूंज उठा। इसके पश्चात भीमा–कोरेगांव शौर्य–विजय स्तंभ की प्रतिकृति को सभी उपस्थितजनों द्वारा सलामी दी गई तथा वीर सपूतों को आदरांजलि अर्पित की गई। इस चरण का संचालन मूल. घेवरचंद्र मौर्य द्वारा किया गया। तत्पश्चात सभी ने एक साथ भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया, जिससे कार्यक्रम में आत्मगौरव और चेतना का संचार हुआ। संगठन के प्रति प्रतिबद्धता एवं समर्पण की प्रतिज्ञा उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं को मूल. डी. एम. कटुआ (को-कन्वीनर, मूलनिवासी संघ कच्छ जिला यूनिट) द्वारा दिलाई गई। इसके बाद मूलनिवासी संघ द्वारा रचित राष्ट्रगीत का सशक्त गायन मूल. मनोज सीजू द्वारा अत्यंत सराहनीय ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के प्रसंगानुकूल विचारोत्तेजक प्रवचन मूल. कैप्टन संतोष कुमार, रमेशभाई महेश्वरी, मीनाक्षीबेन महेश्वरी, आशीष मौर्य, धनजी निंजार, हीरजीभाई सम्राट, कर्मवीर सिंह, अशोक राठौड़, विनोदभाई गवाणिया, नवीनभाई डूंगरखिया तथा भरतभाई भयानी द्वारा दिए गए। वक्ताओं ने महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि मनुस्मृति आधारित व्यवस्था पुनः लागू न हो, इसके लिए भारतीय संविधान में निहित उपायों को दृढ़ता से लागू करना अनिवार्य है। समापन उद्बोधन में मूल. नाराण बी. गरवा ने सशक्त साक्ष्यों के साथ कहा कि वर्तमान समय में अनेक संवैधानिक संस्थाओं पर मनुवादी सोच रखने वाले लोगों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। कई स्थानों पर संविधान की शपथ लेने के बावजूद व्यवहार में मनुवादी कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है। उन्होंने प्रश्न उठाया—इसका उपाय क्या है? उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि भीमा–कोरेगांव के युद्ध में हमारे योद्धा संख्या में अल्प थे, किंतु उनका साहस और हौसला अडिग था। आज एससी, एसटी, ओबीसी तथा उनसे जुड़े धर्मांतरित समुदाय संख्या में बहुसंख्यक हैं। यदि हम वही हौसला और जज़्बा बनाए रखें, तो मनुवादी ताकतें टिक नहीं पाएंगी—या तो उन्हें सही राह पर आना होगा, अथवा जहांसे आए हैं वहां भागना पड़ेगा। यही उनके वक्तव्य का सार था। कच्छ जिले की विभिन्न तहसीलों—भचाऊ, रापर, अंजार, भुज, नखत्राणा एवं नलिया—से पधारे फुले–अंबेडकरी विचारधारा के कार्यकर्ताओं ने भी इस शौर्य दिवस पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और यह संकल्प व्यक्त किया कि सामाजिक आंदोलन को आगे बढ़ाने में वे कभी पीछे नहीं रहेंगे। कार्यक्रम का सफल संचालन मूल. रमेश कन्नर (महासचिव, बामसेफ कच्छ जिला यूनिट) द्वारा किया गया। अंत में मूल. डी. पी. लालण ने सभी उपस्थित मूलनिवासी बहुजनों, वक्ताओं एवं अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की पूर्णाहुति की घोषणा की।

