नई दिल्ली दिनांक 26 सितंबर 2026 को ऑल इंडिया संपादक संघ (पंजी.सं. 121/2023) ने गंगा शाह को उत्तराखंड राज्य का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष करन कुमार और राष्ट्रीय सचिव सतीश आर्या द्वारा ग्रेटर नोएडा स्थित राष्ट्रीय कार्यालय से जारी नियुक्ति पत्र में उनसे सत्यनिष्ठ पत्रकारिता, समाज की आवाज और लोकतंत्र की मजबूती की अपेक्षा की गई है।
यह नियुक्ति केवल संगठनात्मक फैसला नहीं है, बल्कि पहाड़ के वंचित, दलित, शिल्पकार और आपदा पीड़ित समाज की आवाज को धरातल से उठाकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने वाले संघर्ष का सम्मान है।
गंगा शाह की प्रमुख जन-संघर्ष पत्रकारिता : एक नजर में
1. केतन लाल प्रकरण में कानूनी मदद का सवाल (24 सितंबर 2026): नई टिहरी से संवाददाता गंगा शाह की रिपोर्ट ‘सरकार के दावे और जमीन की हकीकत के बीच’ में केतन लाल प्रकरण में पीड़ित परिवार को SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के तहत मिलने वाली कानूनी सहायता, विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति में देरी और 22 अगस्त 2026 से 16 सितंबर 2026 तक आवेदन पर कोई आदेश न होने का मुद्दा उठाया। सवाल पूछा – मुख्यमंत्री की मुस्कुराती तस्वीर और टिहरी की जमीनी तस्वीर के बीच आखिर कितना फासला है?
2. डबल इंजन की नाकामी का ठीकरा दलित विधायकों पर क्यों? अपनी विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में गंगा शाह ने नैनीताल की सरिता आर्य, घनसाली के शक्तिलाल शाह और देहरादून के खजान दास के बहाने सवाल उठाया कि विकास से जुड़े सवालों का राजनीतिक बोझ आखिर दलित जनप्रतिनिधियों पर ही क्यों डाला जाता है। प्रतिनिधित्व मिला, लेकिन अधिकार कितना मिला – इस बहस को तथ्यों, बजट और धरातलीय परिणामों के आधार पर उठाया।
3. घनसाली की सियासी हलचल के बीच वंचित शिल्पकार समाज का सवाल: नई टिहरी से ‘गंगा शाह आशुकवि’ के नाम से प्रकाशित रिपोर्ट में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच विकास, पुनर्वास और समान हिस्सेदारी की मांग उठाई। 4 अगस्त 2026 की रात जंदोली में भूस्खलन से शिल्पकार परिवार का मकान ध्वस्त होने की घटना को सामने रखकर विकास कार्यों का पारदर्शी हिसाब मांगा।
4. बद्रीनाथ 2024 – दलित छोटे दुकानदारों की आवाज: 2024 में बद्रीनाथ धाम में दलित छोटे दुकानदारों के उत्पीड़न को दबाए जाने पर उनकी आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में मदद की।
5. उत्तरकाशी में दलितों को धार्मिक यात्रा से रोकने पर विवाद: भरण गांव में गंगा दशहरे पर सोमेश्वर देवता की डोली के साथ दलितों की देव डोली को शामिल न करने देने के भेदभाव को उजागर किया।
6. दयानंद टम्टा हत्याकांड: बागेश्वर के शिक्षक दयानंद टम्टा की हत्या के विरोध में शिक्षकों के आक्रोश को कवरेज देकर निष्पक्ष जांच की मांग बुलंद की।
7. प्रधानाध्यापिका मंजली आर्या मामला: जाखणीधार की दलित प्रधानाध्यापिका द्वारा प्रधान पति व क्षेत्र पंचायत सदस्य पति पर लगाए गए गंभीर आरोपों को प्रमुखता दी।
8. अल्मोड़ा टम्टा बाजार विरासत: तीन सौ साल पुरानी टम्टा विरासत पर संकट की खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की।
9. जंदोली आपदा ग्राउंड रिपोर्ट: घनसाली के जंदोली में गरीब शिल्पकार परिवार पर पहाड़ टूटने की घटना की स्वयं ग्राउंड पर जाकर रिपोर्टिंग की।
10. रोशनी देवी को न्याय: उत्तरकाशी में अनुसूचित जाति की रोशनी देवी को भोजनमाता बनने के अवसर में हो रहे विलंब को उठाया, जिसके बाद उन्हें नियुक्ति मिली।
11. स्वास्थ्य किल्लत – मगनदास, बहिन रवीना पिलखी: पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लगातार उजागर किया।
वंचित समाज के लिए लिखने पर गंगा शाह को अपमान और धमकियां भी झेलनी पड़ीं, लेकिन उनकी कलम अडिग रही।
नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष गंगा शाह ने कहा, “यह पद मेरे लिए पहाड़ के अंतिम व्यक्ति की आवाज बनने की जिम्मेदारी है।”

