घनसाली (टिहरी) मानसून की दस्तक से पहले भिलंगना ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ सुरक्षा कार्य शुरू न होने से क्षेत्रवासियों में भारी नाराजगी है। जयशंकर ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि आखिर “क्या किसी बड़ी आपदा के घटित होने का इंतजार किया जा रहा है?”
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 और 2025 में भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ से उत्तराखंड के अनेक जिले प्रभावित हुए, जबकि भिलंगना ब्लॉक के दूरस्थ क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं रहे। कई लोगों ने अपनी जान गंवाई, कृषि भूमि नदी में समा गई, पशुधन का नुकसान हुआ और अनेक परिवार भूमिहीन होने की स्थिति में पहुंच गए।
जयशंकर ने बताया कि बुढ़ाकेदारनाथ घाटी में धर्मगंगा और बालगंगा नदियों के उफान से जनजीवन लगातार प्रभावित हो रहा है। हालांकि कुछ स्थानों पर बाढ़ सुरक्षा कार्य हुए हैं, लेकिन कई संवेदनशील क्षेत्रों को इन योजनाओं में शामिल नहीं किया गया। जिन स्थानों को स्वीकृति मिली है, वहां भी महीनों बाद तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
उन्होंने बताया कि कोट, बिशन, जवाणा, तोली, तिनगढ़, लोक जीवन विकास भारती तथा नोटाड़ सहित कई क्षेत्रों के लिए बाढ़ सुरक्षा कार्यों की स्वीकृति काफी पहले मिल चुकी है, लेकिन आज तक धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ। जबकि मानसून बिल्कुल निकट है और खतरा लगातार बढ़ रहा है।
जयशंकर ने विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोक जीवन विकास भारती आश्रम के समीप बालगंगा नदी लगातार कटाव कर रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से आश्रम समिति के भवनों पर खतरा मंडरा रहा है। पूर्व की बाढ़ में नदी का तट काफी ऊपर उठ चुका है और पहली ही तेज बारिश में नदी के बहाव का आश्रम परिसर तक पहुंचने की आशंका बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, सिंचाई विभाग के अधिकारियों और अभियंताओं से लगातार निवेदन किया गया, लेकिन क्षेत्रवासियों को केवल आश्वासन ही मिले। वर्ष 2024 से स्वीकृत बाढ़ सुरक्षा कार्य आज तक शुरू नहीं होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
जयशंकर ने सरकार से मांग की कि सभी स्वीकृत बाढ़ सुरक्षा कार्यों को तत्काल युद्धस्तर पर शुरू किया जाए, ताकि मानसून के दौरान संभावित जन-धन की हानि को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।
गंगा शाह
पत्रकार नई टिहरी

