उत्तरकाशी उत्तरकाशी जनपद के भटवाड़ी तहसील अंतर्गत ग्राम मंजगांव में अनुसूचित जाति (बाजगी) समुदाय के एक गरीब परिवार को कथित रूप से पैतृक आवास से बेदखल करने का मामला तूल पकड़ने लगा है। गांव निवासी मगनदास पुत्र स्व. नैनदास ने जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र सौंपकर ग्राम प्रधान पर लगातार धमकी, मानसिक उत्पीड़न और जबरन बेदखली का प्रयास करने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने परिवार की सुरक्षा, आवास के अधिकार और न्याय की मांग करते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
प्रार्थना-पत्र के अनुसार, मगनदास का परिवार वर्षों से मंजगांव में उसी स्थान पर रह रहा है, जहां उनके पिता स्वर्गीय नैनदास को ग्रामीणों ने पारंपरिक “बाजगी” सेवा के सम्मान में रहने के लिए भूमि उपलब्ध कराई थी। पीड़ित का कहना है कि उनके पास कोई वैकल्पिक आवास या भूमि नहीं है और वर्तमान में उनका परिवार पूरी तरह इसी आशियाने पर निर्भर है।
मगनदास ने आरोप लगाया है कि पिता के निधन के बाद वर्तमान ग्राम प्रधान द्वारा उन्हें वहां से हटाने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने भयादोहन, आपराधिक धमकी और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो उनका परिवार बेघर हो जाएगा।
इस मामले ने सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित की पीड़ा को शब्द देते हुए लिखी गई कविता “मगनदास की अर्ज़ी या संविधान की आख़िरी परीक्षा” सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन रही है। कविता में कहा गया है कि यह केवल एक व्यक्ति की फरियाद नहीं, बल्कि सदियों से वंचित और दबे-कुचले समाज की आवाज़ है। कविता प्रशासन से सवाल करती है कि क्या गरीब और दलित परिवार का आशियाना भी अब सत्ता की इच्छा पर निर्भर रहेगा।
प्रार्थना-पत्र में जिलाधिकारी से परिवार की जान-माल और आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करने, कथित अवैध हस्तक्षेप पर रोक लगाने तथा अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए आवश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। प्रार्थना-पत्र पर संबंधित अधिकारियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश भी अंकित किए गए हैं।
अब पूरा मामला प्रशासन की कार्रवाई पर टिका है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो यह विवाद सामाजिक और कानूनी रूप से और गहरा सकता है।

