बागेश्वर दयानंद टम्टा की नृशंस हत्या के मामले में न्याय दिलाने एवं दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर आज दिनांक 23 जुलाई 2026 को शिल्पकार सभा खरेही के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक बागेश्वर एवं जिलाधिकारी बागेश्वर से भेंट कर विस्तृत वार्ता की तथा विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं से संबंधित ज्ञापन सौंपे।
प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए पत्र में प्राथमिकी दर्ज होने के उपरांत सामने आए महत्वपूर्ण तथ्यों को विवेचना में शामिल करने की मांग की। इस दौरान पुलिस अधीक्षक के साथ विस्तृत चर्चा हुई। पुलिस अधीक्षक ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि पुलिस इस जघन्य हत्याकांड में दोषियों को कठोरतम सजा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि यदि परिजन अथवा समाज का कोई भी व्यक्ति इस प्रकरण से संबंधित कोई साक्ष्य या जानकारी देना चाहता है तो वह किसी भी समय पुलिस को उपलब्ध करा सकता है, जिसका निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा।
इसके उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी बागेश्वर से भेंट कर गंभीर चिंता व्यक्त की कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग के किसी उच्च अधिकारी, महानिदेशक, निदेशक अथवा प्रदेश के शिक्षा मंत्री द्वारा दिवंगत शिक्षक के परिजनों के प्रति शोक-संवेदना व्यक्त नहीं की गई तथा न ही उनसे मुलाकात की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि दयानंद टम्टा की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि विभागीय लापरवाही का भी परिणाम प्रतीत होती है, जिसकी उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
शिल्पकार सभा खरेही ने जिलाधिकारी बागेश्वर के माध्यम से महामहिम राज्यपाल, उत्तराखंड को भी ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में कहा गया कि घटना से पूर्व आरोपी द्वारा अल्मोड़ा मोटर मार्ग पर कार में प्रधानाचार्य की प्रतीक्षा करने तथा प्रधानाचार्य के उतरते ही कार के बागेश्वर की ओर चले जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही यह भी बताया गया कि हत्या के बाद आरोपी स्थानीय दुकानों में बैठा रहा तथा उसे संरक्षण दिए जाने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। इन सभी तथ्यों की निष्पक्ष एवं गहन जांच कर दोषियों एवं संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन के माध्यम से शिल्पकार सभा खरेही ने निम्न प्रमुख मांगें रखीं—
1. स्वर्गीय श्री दयानंद टम्टा के परिजनों के प्रति राज्य सरकार, शिक्षा मंत्री, महानिदेशक एवं निदेशक शिक्षा द्वारा औपचारिक शोक-संवेदना व्यक्त कर तत्काल परिजनों से भेंट की जाए।
2. विवेचना शीघ्र पूर्ण कर आरोप-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए तथा आरोपी को किसी भी परिस्थिति में जमानत न मिले।
3. मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराकर दोषी को कानून के अनुसार आजीवन कठोर कारावास अथवा फांसी जैसी कठोरतम सजा सुनिश्चित की जाए।
4. विभागीय लापरवाही की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए।
5. दिवंगत शिक्षक के परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता, आश्रित को सरकारी सेवा में नियुक्ति तथा अन्य सभी अनुमन्य सुविधाएं तत्काल प्रदान की जाएं।
6. विद्यालय एवं आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं अभिभावक भयमुक्त वातावरण में कार्य कर सकें।
7. हत्या से पूर्व एवं हत्या के बाद आरोपी को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों की निष्पक्ष जांच कर उनके विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे शिल्पकार समाज, शिक्षक समुदाय एवं कानून-व्यवस्था से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। यदि इस मामले में समयबद्ध एवं कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास कमजोर होगा। उन्होंने सरकार एवं प्रशासन से निष्पक्ष, त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।
इस अवसर पर शिल्पकार सभा खरेही के अध्यक्ष पीतांबर लोबियाल, दिवंगत दयानंद टम्टा के बड़े भाई गणेश चंद्र टम्टा, संजय कुमार टम्टा, सभा के कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, नवीन त्रिकोटी, जगमोहन टम्टा, सुधीर कुमार, राजेंद्र कुमार सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

