टिहरी गढ़वाल हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त को आयोजित कांग्रेस की जनसभा के बाद कथित तौर पर हवन-पूजन कर सभा स्थल के ‘शुद्धिकरण’ किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में अधिवक्ता एवं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व जिलाध्यक्ष/प्रदेश प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड कांग्रेस की ओर से आयोजित जनसभा को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संबोधित किया था। ज्ञापन के अनुसार, जनसभा के बाद कुछ व्यक्तियों/समूहों द्वारा सभा स्थल पर हवन-पूजन कर कथित रूप से उसका ‘शुद्धिकरण’ किया गया और खड़गे के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई।
शांति प्रसाद भट्ट ने आरोप लगाया कि यदि किसी व्यक्ति की अनुसूचित जाति से संबंधित होने के कारण उसके संबोधन के बाद किसी सार्वजनिक स्थल को ‘अशुद्ध’ मानकर उसका शुद्धिकरण किया जाता है, तो यह सामाजिक समानता और सम्मान की भावना के विरुद्ध गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज में जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता की मानसिकता को बढ़ावा दे सकती हैं।
ज्ञापन में राष्ट्रपति से मांग की गई है कि मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही सभा स्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज, मोबाइल वीडियो, सोशल मीडिया पर प्रसारित फोटो एवं वीडियो तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर जांच में शामिल करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि हवन अथवा ‘शुद्धिकरण’ करने वाले व्यक्तियों की पहचान कर भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए। घटना के पीछे जातिगत भेदभाव एवं अस्पृश्यता की भावना की भी जांच करने की मांग की गई है।
अधिवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि मामला केवल किसी एक व्यक्ति के अपमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समानता, सामाजिक सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने राष्ट्रपति से मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र वैधानिक कार्रवाई के निर्देश देने का अनुरोध किया है।

