ग्राम पंचायत गंगाड़ निवासी शंकर दास उर्फ बब्लू दास की पत्नी आमिना और उनके नवजात बच्चे की ओसला में मौत की दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक मां और उसके नवजात की मौत केवल एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं है, बल्कि यह दुर्गम पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं, सड़क व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
बताया जा रहा है कि आमिना की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए एयरलिफ्ट से देहरादून भेजने की बात कही गई थी, लेकिन खराब मौसम के कारण हेली सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि जब मौसम खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर नहीं उड़ सकता था, तब मरीज की जान बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या थी?
प्रसव पीड़ा मौसम देखकर नहीं आती। गंभीर मरीज यह इंतजार नहीं कर सकता कि आसमान साफ होगा, तब इलाज मिलेगा। पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में आज भी खराब सड़कें, दूर अस्पताल, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन परिवहन की कमी लोगों के जीवन पर भारी पड़ रही है।
हम किसी व्यक्ति, जनप्रतिनिधि या अधिकारी पर बिना जांच के आरोप नहीं लगा रहे हैं। लेकिन एक नागरिक और पत्रकार होने के नाते सवाल पूछना हमारा अधिकार है। आमिना और उनके नवजात की मौत के पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हेली सेवा का लॉग, मौसम रिपोर्ट तथा मरीज को बेहतर अस्पताल पहुंचाने के लिए किए गए प्रयासों की वास्तविक जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर दुर्गम क्षेत्र में रहने वाले गरीब और वंचित परिवार की जिंदगी की कीमत क्या कम है? अगर यही घटना किसी बड़े, प्रभावशाली या संपन्न परिवार के साथ होती, तो क्या सरकारी व्यवस्था के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता?
यह सवाल किसी जाति या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। यह सवाल व्यवस्था की समानता और इंसान की जिंदगी की कीमत का है।
यदि व्यवस्था वास्तव में सबके लिए समान है, तो फिर पहाड़ के गरीब, दलित और दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों को भी वही आपातकालीन सुविधा मिलनी चाहिए, जिसकी अपेक्षा शहरों और प्रभावशाली परिवारों को होती है।
जाति देखकर इलाज नहीं, इंसान देखकर इलाज होना चाहिए।
गरीबी देखकर सुविधा नहीं, जरूरत देखकर व्यवस्था होनी चाहिए।
आमिना बहन और उनके नवजात की मौत से सबक लेते हुए सरकार और प्रशासन को दुर्गम क्षेत्रों के लिए मजबूत स्वास्थ्य, सड़क और आपातकालीन परिवहन व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और मां और उसके बच्चे को इलाज के इंतजार में अपनी जान न गंवानी पड़े।
आमिना बहन और उनके नवजात शिशु को विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏
✍️ गंगा शाह ‘आशुकवि’
स्वतंत्र पत्रकार

