नई दिल्ली उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। अंकिता के माता-पिता बुधवार को नई दिल्ली में इंडिया गेट के पास धरने पर बैठ गए। इस बीच पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने अंकिता को न्याय दिलाने में हो रही देरी और राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर नियुक्ति को लेकर मोदी सरकार पर तीखा निशाना साधा है।
प्रदीप टम्टा ने कहा कि अंकिता भंडारी को आखिर न्याय कब मिलेगा? उस कथित वीआईपी का नाम सामने लाने की मांग लगातार उठती रही है, जिसे कथित तौर पर अतिरिक्त सेवाएं देने के लिए अंकिता पर दबाव बनाए जाने की बात कही गई थी। इस मामले में अंकिता के माता-पिता ने पूर्व में भाजपा के दो नेताओं की ओर भी सवाल उठाए थे, जिनमें तत्कालीन भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम का नाम शामिल होने का दावा किया जाता रहा है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण निष्पक्ष जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
सीबीआई जांच के बावजूद न्याय को लेकर सवाल
पूर्व सांसद ने सवाल उठाया कि जनदबाव के बाद सीबीआई जांच की घोषणा होने के बावजूद यदि पीड़ित परिवार के मन में न्याय को लेकर सवाल बने हुए हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता लंबे समय से अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी पीड़ा और सवालों का संतोषजनक समाधान होना जरूरी है।
टम्टा ने राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर भी केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर इस प्रकरण के संबंध में आरोप लगाए जाते रहे हैं, उसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर नियुक्त किए जाने से जनता के मन में सवाल पैदा होना स्वाभाविक है। हालांकि, किसी व्यक्ति पर आरोप लगना और आरोप सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं।
‘मोदी सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे
प्रदीप टम्टा ने केंद्र सरकार से अपने फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में जनता की भावनाओं और अंकिता के परिवार की न्याय की मांग को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति से संबंधित नियुक्ति के संबंध में केंद्र सरकार की सिफारिश पर पुनर्विचार किए जाने की मांग भी उठाई।
उन्होंने कहा कि जब एक पीड़ित परिवार को अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए राजधानी दिल्ली में धरने पर बैठना पड़े, तो यह व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने और मामले से जुड़े अनुत्तरित सवालों के जवाब पाने की उम्मीद में संघर्ष कर रहे हैं।
‘यह सभी बेटियों के अधिकारों की लड़ाई है’
पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि अंकिता भंडारी का मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है। यह उन सभी बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा सवाल है, जो सार्वजनिक जीवन और कार्यस्थलों पर अपने हिस्से की बराबरी और सम्मान के लिए संघर्ष कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय मिलना, मामले से जुड़े सभी सवालों का निष्पक्ष जांच के जरिए जवाब मिलना और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलना जरूरी है। अंकिता के माता-पिता का संघर्ष समाज और सरकार दोनों के सामने जवाबदेही का सवाल खड़ा करता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और जांच एजेंसियां अंकिता के परिवार की मांगों पर क्या कदम उठाती हैं और मामले से जुड़े सवालों का समाधान किस तरह किया जाता है।
संवादाता UCN गंगा शाह

