उत्तराखंड विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अधिसूचित UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन संबंधी) विनियम–2026 को एसोसिएशन उत्तराखंड ने उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय, समान अवसर एवं समावेशन सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं सराहनीय पहल बताया है।
एसोसिएशन उत्तराखंड का कहना है कि इन विनियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में लंबे समय से व्याप्त जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त कर सभी वर्गों के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए भयमुक्त, सम्मानजनक एवं समान वातावरण का निर्माण करना है। विशेष रूप से यह उल्लेखनीय है कि पहली बार इन विनियमों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी स्पष्ट रूप से कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है, जो सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है। प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में समान अवसर केंद्र (EOC) एवं समता समिति का अनिवार्य गठन, जिसमें SC, ST, OBC, दिव्यांगजन एवं महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है, संस्थानों में सहभागिता आधारित एवं उत्तरदायी व्यवस्था को सशक्त बनाएगा। साथ ही संस्थान प्रमुख की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी, नियमित रिपोर्टिंग प्रणाली तथा राष्ट्रीय स्तर की निगरानी समिति का गठन इन विनियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि गैर-अनुपालन की स्थिति में कड़े दंडात्मक प्रावधान यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि अब समता केवल कागज़ी नीति नहीं, बल्कि व्यवहार में लागू की जाने वाली अनिवार्य व्यवस्था होगी। एसोसिएशन उत्तराखंड विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के इस दूरदर्शी निर्णय का पूर्ण समर्थन करता है तथा सभी उच्च शिक्षा संस्थानों से अपेक्षा करता है कि वे UGC समता के संवर्धन विनियम–2026 का ईमानदारी, संवेदनशीलता एवं पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ पालन सुनिश्चित करें, ताकि उच्च शिक्षा वास्तव में समानता और सामाजिक न्याय का प्रभावी माध्यम बन सके।
सुरेश चंद्र (प्रांतीय महामंत्री)
अनु0 जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन उत्तराखंड

