पिथौरागढ़ आज का दिन भारतीय न्यायपालिका और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट विश्वास का दिन है। पिथौरागढ़ की स्थानीय अदालत ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ‘राज्य सरकार बनाम किशोर राम’ मामले में पत्रकार किशोर राम (किशोर ह्यूमन) को सभी आरोपों से ससम्मान दोषमुक्त (Acquit) कर दिया है। यह निर्णय न केवल एक व्यक्ति की जीत है, बल्कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पुनर्स्थापना है।
’वंचित स्वर’ परिवार में हर्ष की लहर
किशोर ह्यूमन की इस जीत पर ‘वंचित स्वर’ के संपादक डॉ. प्रमोद कुमार और पूरी वंचित स्वर टीम ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। संपादक डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि यह सत्य की जीत है और उन ताकतों के लिए जवाब है जो सच्चाई की आवाज को दबाना चाहती थीं। टीम के सभी सदस्यों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे पत्रकारिता की मर्यादा की जीत बताया है।
संविधान: हमारी सबसे बड़ी ढाल
न्याय की यह उपलब्धि बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान की शक्ति का जीवंत प्रमाण है। बाबा साहेब ने हमें वह कानूनी सुरक्षा प्रदान की है, जो व्यवस्था के सामने भी सत्य को अडिग रखती है। यह फैसला उन सभी के लिए एक उम्मीद है जो समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज उठाते हैं।
जन-शक्ति का आभार: समाज ही बना ढाल
अपनी रिहाई के बाद किशोर ह्यूमन ने भावुक होते हुए कहा, “मैं यह लड़ाई केवल इसलिए लड़ पाया क्योंकि समाज के लोगों ने हर प्रकार से मेरी मदद की।” उत्तराखंड से लेकर देश के विभिन्न कोनों तक, जब-जब संघर्ष गहराया, तब-तब लोगों की सामूहिक एकजुटता ने उन्हें टूटने नहीं दिया। यह जीत उन सभी साथियों को समर्पित है जो हर मुश्किल घड़ी में उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे।
प्रेस विज्ञप्ति के मुख्य बिंदु:
विशेष आभार: वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप पाठक की प्रभावी और विशेषज्ञ कानूनी पैरवी ने अदालत के समक्ष सच्चाई को मजबूती से रखा।
ऐतिहासिक समर्थन: किशोर ह्यूमन ने विशेष रूप से लेखक और चिंतक मोहन मुक्त के उस ऐतिहासिक समर्थन को याद किया, जब फरवरी 2022 में जेल में रहते हुए उनकी जमानत नहीं हो पा रही थी। मोहन मुक्त की उस प्रखर लेखनी और सक्रियता ने ही समाज को उनके संघर्ष से जोड़ा और न्याय की एक बड़ी लहर पैदा की।
गवाहों का साहस: अदालत में उन गवाहों की सत्यनिष्ठा की भी जीत हुई, जिन्होंने तमाम दबावों के बावजूद केवल सच का साथ दिया।
सफर जारी रहेगा…
संपादक डॉ. प्रमोद कुमार और किशोर ह्यूमन ने संकल्प लिया है कि ‘वंचित स्वर’ के माध्यम से हाशिए पर खड़े समाज, भूमिहीन परिवारों और वंचित छात्रों की आवाज उठाने का अभियान अब और भी मज़बूत होगा। हम संविधान के दायरे में रहकर अपनी लेखनी से समाज के अंतिम व्यक्ति के हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
सत्यमेव जयते!
जय भीम! जय संविधान!

