डॉ बाबासाहाब आंबेडकर ने अपनी पुस्तक Ranade, Gandhi and Jinnah में “महान व्यक्ति” (Great Man) की अवधारणा पर गंभीर विचार किया है। उनके अनुसार महानता केवल प्रसिद्धि, सत्ता या लोकप्रियता से नहीं आती। बाबासाहब लिखते हैं
“महान व्यक्ति वह है जो समाज के पुनर्निर्माण के लिए कार्य करता है; जो समाज का आलोचक (Scourge) भी होता है और समाज का सफाईकर्मी (Scavenger) भी।”
इसका अर्थ,
(Scourge) — समाज का आलोचक, जो समाज में मौजूद अन्याय, अंधविश्वास, असमानता और गलत परंपराओं को चुनौती देता है।
(Scavenger) — समाज का सफाईकर्मी, जो समाज की बुराइयों को दूर करने और उसे बेहतर बनाने का कार्य करता है।
डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के अनुसार केवल बुद्धिमान या ईमानदार होना किसी व्यक्ति को महान नहीं बनाता। महान बनने के लिए व्यक्ति में ईमानदारी (Sincerity), बौद्धिक क्षमता (Intellect) और समाज परिवर्तन के प्रति समर्पण (Social Purpose) होना जरुरी है l
उनके अनुसार
जो व्यक्ति अपनी बुद्धि और नैतिकता का उपयोग समाज के उत्थान और परिवर्तन के लिए करता है, वही वास्तव में महान कहलाने योग्य है।
कुछ व्यक्तित्व केवल संगठन का हिस्सा नहीं होते, बल्कि वे स्वयं एक विचार, एक दिशा और एक सतत प्रेरणा बन जाते हैं। बामसेफ आंदोलन में मा. बी. डी. बोरकर साहब का योगदान इसी प्रकार का माना जाता है। उन्होंने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामाजिक चेतना, संगठन निर्माण और बहुजन समाज के वैचारिक सशक्तिकरण के लिए समर्पित किया है।
आज आदरणीय बोरकर साहब का ७५ वा जन्म दिन है l खपरी गाँव, जिला भंडारा, महाराष्ट्र मे उनका जन्म हुया l वर्ष 1977 में मुंबई कस्टम विभाग में वो भर्ती हुए और 34 वर्षों तक समर्पित सेवाएँ प्रदान कीं। 30 जून 2011 को मुंबई से कमिशनर के पद से सेवानिवृत्त हुए।
उनका व्यक्तित्व केवल संगठनात्मक नेतृत्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अध्ययन, चिंतन और सामाजिक प्रतिबद्धता का एक सुंदर संयोजन रहा है। उनकी विद्वत्ता (Erudition) और विषयों की गहराई से समझ ने अनेक कार्यकर्ताओं को केवल आंदोलन से जोड़ने का काम नहीं किया, बल्कि उन्हें विचारशील और उत्तरदायी सामाजिक कार्यकर्ता बनने की प्रेरणा भी दी।
बामसेफ का मूल उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन, समानता, न्याय और बहुजन समाज में जागरूकता का विस्तार रहा है। ऐसे उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास, धैर्य और दीर्घकालिक दृष्टि की आवश्यकता होती है। मा. बोरकर साहब ने इन मूल्यों को अपने कार्य और जीवन में प्रतिबिंबित किया है।
उनकी कार्यशैली में अनुशासन, निरंतरता और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा दिखाई देती है। आंदोलन के कठिन दौरों में भी संगठनात्मक कार्य को जीवित रखना और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा बनाए रखना किसी साधारण प्रतिबद्धता का परिणाम नहीं होता।
बामसेफ और उनके स्कंध संघटन मे विविध पद पर कार्य, संघटन में लोकतंत्र को विकसित कराना, सामूहिक नेतृत्व, संस्थाईकरन की प्रक्रिया, इन बुनियादी अंगोपर उन्होंने काम किया है l यशकायी डी. के. खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट के चेअरमन राहेकर ‘राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले क्रांती संस्थान’ के निर्माण में उनका योगदान महत्वपूर्ण है l
आज उनके जन्मदिन के अवसर पर हम उनके स्वास्थ्य, दीर्घायु और सतत सामाजिक योगदान की कामना करते हैं। आने वाले वर्षों में भी उनका अनुभव, मार्गदर्शन और वैचारिक ऊर्जा नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं को प्रेरित करती रहे।
जन्मदिन की हार्दिक मंगलकामनाएँ।
आपका जीवन बहुजन आंदोलन के लिए इसी प्रकार प्रेरणास्रोत बना रहे। #मूळनिवासी_सभ्यता_संघ #मूळनिवासी
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