घनसाली (टिहरी गढ़वाल) जनपद टिहरी गढ़वाल के सुदूर संवेदनशील सीमांत गांव तोली पर एक बार फिर आपदा का खतरा गहरा गया है। गांव के ठीक नीचे बहने वाली बालगंगा नदी के तेज बहाव से लगातार भू-कटाव और भूस्खलन हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि गांव की कृषि भूमि और आवासीय क्षेत्र धीरे-धीरे धंसने लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बीते कुछ दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से गांव के निचले हिस्से में करीब 50 मीटर से अधिक क्षेत्र में गहरी दरारें पड़ गई हैं, जिससे पूरे गांव में भय और दहशत का माहौल है।
2024 की आपदा का दर्द आज भी ताजा
ग्रामीण बताते हैं कि वर्ष 2024 की विनाशकारी आपदा में तोली गांव ने अपनों को खोया था। उस भीषण त्रासदी में एक मां और बेटी की दर्दनाक मौत हो गई थी। आपदा के बाद स्थायी सुरक्षा और पुनर्वास के बड़े-बड़े आश्वासन दिए गए, लेकिन दो वर्ष बाद भी गांव सुरक्षित नहीं हो सका। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शासन-प्रशासन को ज्ञापन और शिकायतें दी गईं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पूर्व जनप्रतिनिधि के बयान पर उठे सवाल
मामले में एक पूर्व जनप्रतिनिधि ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में भूस्खलन प्रभावित ऊपरी क्षेत्र का पुनर्वास कराया जा चुका है तथा बालगंगा के किनारे सुरक्षात्मक कार्य के लिए डीपीआर तैयार होकर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी है और निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होगा।
हालांकि इस बयान के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि पुनर्वास पूरा हो चुका था तो वर्ष 2024 में लोगों की जान कैसे गई? यदि डीपीआर स्वीकृत है तो दो वर्षों से मौके पर सुरक्षात्मक कार्य क्यों शुरू नहीं हुआ? ग्रामीणों ने इसे केवल कागजी विकास बताते हुए तत्काल कार्य शुरू करने की मांग की है।
ग्राम प्रधान बोले—विस्थापन करवाने में कोई सेटिंग नहीं, गांव बचाने की जरूरत
वर्तमान ग्राम प्रधान सुनीता देवी ने कहा कि तोली गांव के विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया में किसी भी ग्रामीण के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज पूरा गांव अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है और अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा।
प्रधान ने मांग की कि सुरक्षात्मक कार्य और निर्माण ऐसे सक्षम, अनुभवी और निष्पक्ष ठेकेदारों से कराया जाए जो गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करें, ताकि भविष्य में इस प्रकार की त्रासदी दोबारा न हो। उन्होंने कहा कि गांव के हित में होने वाले प्रत्येक विकास कार्य ग्राम पंचायत की सर्वमान्य नीति और ग्रामीणों की सहमति के आधार पर किए जाएं, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और गांव का भविष्य सुरक्षित हो सके।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से बालगंगा नदी पर तत्काल सुरक्षात्मक दीवार का निर्माण, प्रभावी भू-सुरक्षा कार्य तथा निष्पक्ष पुनर्वास प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे क्षेत्र के लोग जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए, ताकि सीमांत गांव तोली का अस्तित्व बचाया जा सके।

