नई टिहरी जुलाई 2024 में आई भीषण आपदा ने टिहरी जनपद के तिनगढ़ और भ्योटि गांव के लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। दो वर्ष बीत जाने के बाद भी आपदा प्रभावित परिवार आज मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार और प्रशासन द्वारा किए गए कई बड़े वादे अब तक धरातल पर नहीं उतर पाए हैं, जिससे ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
आपदा के बाद विस्थापित भ्योटि गांव को राजस्व ग्राम बनाने, “मिनी मसूरी” के रूप में विकसित करने और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की घोषणाएं की गई थीं। लेकिन आज भी न तो पक्का सड़क मार्ग बन पाया है, न विद्यालयों का पुनर्निर्माण हुआ है और न ही बिजली सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध हो सकी हैं।
आपदा में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए थे। वर्तमान में बच्चे एक सामाजिक संस्था द्वारा उपलब्ध कराए गए टीन शेड में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। वहीं छोटे-छोटे बच्चों को प्रतिदिन लगभग दो किलोमीटर जंगल के रास्ते होकर विद्यालय जाना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह रास्ता झाड़ियों से भर जाता है और जंगली जानवरों का खतरा लगातार बना रहता है।
घर निर्माण के लिए प्रति परिवार लगभग 4.40 लाख रुपये की सहायता दी गई, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इतनी राशि में सुरक्षित और पक्का मकान बनाना संभव नहीं है। कई परिवार आज भी अस्थायी व्यवस्थाओं में जीवन बिताने को विवश हैं।
तिनगढ़ गांव के निवासी प्रदीप सेमवाल ने बताया कि गांव की समस्याएं बेहद जटिल हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के दो वर्ष बाद भी सड़क, विद्यालय, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। बच्चों और बुजुर्गों को रोज जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती है। यदि किसी दिन कोई हादसा हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान गांव के विकास के बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि आपदा के बाद एक बार भी गांव की वास्तविक स्थिति देखने नहीं पहुंचे। इससे लोगों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में उन्हें केवल आश्वासन मिले, समाधान नहीं।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से मांग की है कि तिनगढ़ गांव से विस्थापित भ्योटि गांव तक शीघ्र पक्का सड़क मार्ग बनाया जाए, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय का स्थायी भवन बनाया जाए, बिजली सहित सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा भ्योटि गांव को राजस्व ग्राम घोषित कर पुनर्वास से जुड़े सभी वादों को जल्द पूरा किया जाए।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद इस गांव से आज तक पलायन नहीं हुआ है। गांव के लोग अपने गांव और अपनी मिट्टी को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर काम करने की जरूरत है।

