घनसाली घनसाली विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों राजनीतिक नोकझोंक, बदलते समीकरणों और संगठनों के बीच बढ़ती हलचल चर्चा का विषय बनी हुई है। स्वास्थ्य संघर्ष समिति के भाजपा में विलय के बाद राजनीतिक बहस और तेज हुई है। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन बदलते सियासी समीकरणों के बीच क्षेत्र के मूल विकास के मुद्दों को कितनी प्राथमिकता मिल रही है?
राजनीति में संगठन बदलना और नए राजनीतिक समीकरण बनना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन जनता यह भी जानना चाहती है कि जिन मुद्दों को लेकर संघर्ष और आंदोलन हुए, उनका वास्तविक परिणाम क्या निकला। स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा, रोजगार और आपदा प्रभावित परिवारों का पुनर्वास आज भी क्षेत्र के महत्वपूर्ण सवाल हैं।
जंदोली त्रासदी ने सामने रखी वंचित बस्ती की पीड़ा
4 अगस्त 2026 की रात करीब 8:35 बजे घनसाली विकासखंड के मुहल्लगांव के जंदोली तोक में हुए भूस्खलन ने संवेदनशील बस्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। अनुसूचित जाति (शिल्पकार) बस्ती के एक गरीब परिवार का मकान मलबे में दब गया। संजय लाल, मुकंद लाल और बलवीर लाल सहित अन्य परिवारों के मकानों में दरारें आने की बात सामने आई। प्राथमिक विद्यालय भी खतरे की जद में बताया गया।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने खतरे की जानकारी पहले ही संबंधित स्तरों पर दी थी। अब प्रभावित परिवार सुरक्षित एवं स्थायी पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। ऐसे में भू-वैज्ञानिक सर्वे, संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हांकन और आपदा प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।
वंचित शिल्पकार समाज की स्पष्ट मांगें
वंचित शिल्पकार समाज की प्रमुख मांगों में बस्तियों तक पक्की सड़क और परिवहन सुविधा, स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त डॉक्टर व दवाइयां, सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, युवाओं के लिए रोजगार एवं कौशल प्रशिक्षण, पेयजल और बिजली की बेहतर व्यवस्था तथा पात्र परिवारों तक सरकारी योजनाओं का पारदर्शी लाभ शामिल है।
साथ ही समाज की मांग है कि समान अवसर, सामाजिक सम्मान और विकास योजनाओं में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
विकास कार्यों का हो पारदर्शी हिसाब
घनसाली विधानसभा क्षेत्र में वंचित शिल्पकार समाज के लिए किए गए विकास कार्यों की निष्पक्ष और तथ्याधारित समीक्षा की मांग भी महत्वपूर्ण है। कितनी योजनाएं स्वीकृत हुईं, कितना बजट आया, कितना खर्च हुआ, किन क्षेत्रों में कार्य हुए और उनका वास्तविक लाभ कितने परिवारों तक पहुंचा—इन सवालों का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।
जांच में कागजी रिकॉर्ड के साथ स्थल निरीक्षण, लाभार्थियों का सत्यापन और कार्यों की गुणवत्ता भी शामिल होनी चाहिए। किसी स्तर पर अनियमितता के प्रमाण मिलें तो नियमानुसार कार्रवाई हो और सही कार्यों की जानकारी भी जनता के सामने रखी जाए।
सियासी समीकरणों से बड़ा है जनता का सवाल
घनसाली में बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन लोकतंत्र में जरूरी है कि राजनीतिक गतिविधियों में पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही बनी रहे। किसी भी प्रकार की राजनीतिक सौदेबाजी संबंधी चर्चा हो तो उसका आकलन प्रमाण और तथ्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
आखिर घनसाली की जनता को राजनीतिक शोर से अधिक सड़क, अस्पताल, स्कूल, रोजगार, सुरक्षित पुनर्वास और समान विकास चाहिए।
वंचित शिल्पकार समाज का सवाल स्पष्ट है—
समान अधिकार, समान अवसर और विकास में समान हिस्सेदारी।
राजनीतिक समीकरण बदलते रहें, लेकिन जनता के मुद्दे नहीं बदलने चाहिए।
— गंगा शाह ‘आशुकवि’
पत्रकार, नई टिहरी

