देहरादून अनुसूचित जाति–जनजाति शिक्षक एसोसिएशन, उत्तराखण्ड की 19 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन स्तर पर 21 अक्टूबर 2026 को सचिवालय में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने की। बैठक में विभिन्न संबंधित विभागों के सचिवों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में संगठन की मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राठी ने संगठन का पक्ष रखते हुए 19 सूत्रीय मांगों से संबंधित विस्तृत तथ्य एवं साक्ष्य प्रस्तुत किए। उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों, शासनादेशों, विभागीय पत्रों तथा न्यायालयों के निर्णयों के आधार पर मांगों की आवश्यकता एवं औचित्य को विस्तार से स्पष्ट किया।
वार्ता में छात्रवृत्ति व्यवस्था में सुधार, न्यायमूर्ति इरशाद हुसैन आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने, आरक्षण एवं पदोन्नति, बैकलॉग के रिक्त पदों को भरने, आउटसोर्सिंग में आरक्षण, शिक्षकों के स्थानांतरण, पुरानी पेंशन, गोल्डन कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र सहित अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त सेवारत शिक्षकों पर टीईटी (TET) की अनिवार्यता के विषय पर भी विस्तार से वार्ता हुई। इसमें वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त प्रारंभिक शिक्षकों को टीईटी से छूट तथा माध्यमिक शिक्षा के एल०टी० संवर्ग में टीईटी-II की अनिवार्यता की प्रासंगिकता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने इस संबंध में न्यायालयों के निर्णयों एवं उपलब्ध विधिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
संगठन की ओर से स्पष्ट किया गया कि ये मांगें केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय, समान अवसर तथा शिक्षा एवं रोजगार में भागीदारी से संबंधित हैं।
बैठक में प्रदेश महामंत्री सुरेश चंद्र, मीडिया प्रभारी संजय कुमार, महासचिव दीपक कुमार तथा सचिवालय संघ के अध्यक्ष कमल कुमार भी उपस्थित रहे।
प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राठी ने कहा कि संगठन पिछले लंबे समय से लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से इन मांगों को शासन के समक्ष उठाता रहा है। मुख्यमंत्री जी के साथ 24 जुलाई को हुई वार्ता के बाद सचिव कार्मिक की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ बैठक आयोजित होना संगठन के संघर्ष की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल मांगें प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि उनका विधिसम्मत एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित कराना है। संगठन को उम्मीद है कि शासन इन विषयों पर सकारात्मक पहल करते हुए शीघ्र ठोस निर्णय लेगा।
उन्होंने शासन के अधिकारियों का बैठक आयोजित करने एवं संगठन का पक्ष सुनने के लिए आभार व्यक्त किया।

