उत्तराखंड राज्य में शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, समानतामूलक और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में निदेशक माध्यमिक डॉ. मुकुल सती द्वारा महत्वपूर्ण आदेश जारी किए गए हैं। यह आदेश मंडलीय अपर निदेशकों एवं प्रदेश के समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्गत किया गया है। आदेश के तहत जाति और लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से विद्यालय, विकासखंड, जिला एवं मंडल स्तर पर कमेटियों का गठन किया जाएगा। ये कमेटियां सतत निगरानी के साथ-साथ प्राप्त शिकायतों के निस्तारण का भी कार्य करेंगी, जिससे शैक्षणिक वातावरण में समानता और न्याय सुनिश्चित किया जा सके। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है
कि सभी शिक्षक संगठनों के साथ अनु० जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन उत्तराखंड को भी ब्लॉक से लेकर प्रांतीय स्तर तक आयोजित बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा, ताकि नीति-निर्माण एवं शैक्षिक संवाद में सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त, विद्यालयों में समय-समय पर भारत के संविधान की प्रस्तावना एवं संविधान का पाठ पढ़ाए जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों में समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक मूल्यों का विकास हो। शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं नवाचारी कार्यक्रमों में भी सभी की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन मांगों को लेकर अनु० जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राठी ने मुख्यमंत्री, महानिदेशक शिक्षा एवं निदेशक माध्यमिक से वार्ता की थी। इस संवाद के सकारात्मक परिणामस्वरूप जारी आदेश को एसोसिएशन ने स्वागत योग्य एवं दूरगामी प्रभाव वाला कदम बताया है।
जगदीश राठी
प्रदेश अध्यक्ष
अनु० जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन उत्तराखंड

