उत्तराखंड में अनुसूचित जाति–जनजाति समाज में इन दिनों गहरी निराशा और आक्रोश का माहौल बनता जा रहा है। समाज का कहना है कि लंबे समय से उनके संवैधानिक अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय लंबित पड़े हैं, जिससे समाज स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सबसे प्रमुख विषय लंबे समय से लंबित इरशाद हुसैन रिपोर्ट का है, जिसे आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। रिपोर्ट सार्वजनिक न होने के कारण आरक्षण से जुड़े वास्तविक तथ्यों और विसंगतियों पर पारदर्शिता नहीं बन पाई है। समाज का मानना है कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और नीतिगत निर्णय पारदर्शी तरीके से लिए जा सकेंगे।
इसके अतिरिक्त, न्यायालय के किसी भी स्पष्ट आदेश में पदोन्नति पर पूर्ण रोक का उल्लेख न होने के बावजूद कई विभागों में पदोन्नतियाँ रोकी जा रही हैं, जिससे पात्र कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। विभिन्न विभागों में रोस्टर प्रणाली का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण अनुसूचित जाति–जनजाति वर्ग को उनका वैधानिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। वहीं वर्षों से लंबित बैकलॉग पदों पर भर्ती अभियान भी प्रारंभ नहीं किया गया है। साथ ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से हो रही भर्तियों में भी आरक्षण व्यवस्था का समुचित पालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, जिससे आरक्षित वर्ग के योग्य युवाओं को अवसर नहीं मिल पा रहा। इसके अलावा स्कूलों में अनुसूचित जाति–जनजाति विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति के नियमों में भी कई व्यावहारिक कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं।
अनुसूचित जाति–जनजाति शिक्षक एसोसिएशन, उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राठी ने कहा कि वर्तमान में राज्य में बजट सत्र चल रहा है और यह समय सरकार के लिए नीतिगत निर्णय लेने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सरकार से अपेक्षा की कि अनुसूचित जाति–जनजाति समाज से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार किया जाए और ठोस निर्णय लिए जाएं। उन्होंने बताया कि इन विषयों को लेकर शीघ्र ही माननीय मुख्यमंत्री से वार्ता की जाएगी। साथ ही विभिन्न जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित संगठनों से भी मुलाकात कर इन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और उनके साथ समन्वय बनाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
प्रमुख मांगें
1 इरशाद हुसैन रिपोर्ट को शीघ्र सार्वजनिक किया जाए।
2 पदोन्नति प्रक्रिया को स्पष्ट आदेशों के अनुरूप बहाल किया जाए।
3 सभी विभागों में आरक्षण रोस्टर का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
4 लंबित बैकलॉग पदों पर विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए।
5 आउटसोर्सिंग भर्तियों में भी आरक्षण व्यवस्था लागू की जाए।
6 स्कूलों में अनुसूचित जाति–जनजाति विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के नियमों में शिथिलीकरण तथा छात्रवृत्ति की धनराशि में वृद्धि की जाए।
जगदीश राठी
प्रदेश अध्यक्ष
अनुसूचित जाति–जनजाति शिक्षक एसोसिएशन, उत्तराखंड

