नागपुर (महाराष्ट्र) मूलनिवासी बहुजन संगठनों की राष्ट्रीय सहयोग एवं समन्वय समिति द्वारा 13–14 जून 2026 को राष्ट्रपिता जोतिबा फुले सामाजिक क्रांति संस्थान रिंगनाबोडी, नागपुर महाराष्ट्र में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर व राष्ट्रीय चिंतन बैठक संपन्न हुई। प्रशिक्षण की शुरूआत संविधान के सम्मान में मूलनिवासी राष्ट्रीय गीत के साथ शुरू की गई। उप निदेशक डी.के. खापर्डे मेमोरिल ट्रस्ट, प्रशिक्षण विभाग मू. जय हिन्द सिंह ने स्वागत भाषण किया और प्रशिक्षण से संबंधित आवश्यक दिशा निर्देश प्रशिक्षार्थियों को दिए तथा डी.के. खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट का परिचय भी दिया। एनसीसीएमबीओ के राष्ट्रीय महासचिव, मू. महादेव कांबले ने प्रशिक्षण की प्रस्ताविक भूमिका रखी। उन्होने कहा कि यह बैठक और प्रशिक्षण शिविर समस्याओं के समाधान करने के लिए रखी गई है। डी.के. खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट के चेयरमैन मू. बी.डी. बोरकर ने उद्घाटन भाषण में बोलते हुए कहा कि समाज में अनेक लोगों ने अपने–अपने समय में आंदोलन किए और अन्याय–अत्याचार के खिलाफ आवाज उठायी। अनेक समय पर लोग आंदोलन की कोशिश करते रहे हैं। लोग उन सभी संगठनों से जुड़ते भी रहे हैं। इसका मतलब यह है कि उन संगठनों की समाज को जरूरत है। इन संगठनों के उद्देश्य समय, परिस्थिति और वातावरण के अनुसार निर्धारित होते रहे हैं। और कुछ उद्देश्यों में कामयाब भी हुए हैं। लेकिन व्यवस्था परिवर्तन के लिए आज सभी संगठनों को एकत्रित होने की जरूरत है। हम सभी लोग इकट्ठा होकर ही व्यवस्था परिवर्तन कर सकते हैं।
एनसीसीएमबीओ के राष्ट्रीय संयोजक सुरेश द्रविड़ ने ट्रेंनिग डायरेक्टर्स कमेटी के सदस्यों का आभार व्यक्त किया तथा डी.के. खापर्डे मेमोरियल ट्रस्ट के चेयरमैन का भी आभार प्रकट किया। उन्होने एनसीसीएमबीओ के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसकी शुरूआत 2021 से की गई है। हमारे साथियों ने यह महसूस किया कि सभी फुले–अम्बेडकरी संगठनों को अब एक साथ आने की आवश्यकता है। हमने 2021 में यहीं पर 200 संगठनों को आमंत्रित किया था। 28 एवं 29 अगस्त 2021 को राष्ट्रपिता जोतिबा फुले सामाजिक क्रांति संस्थान रिंगनाबोडी में 46 संगठनों के 90 लोगों ने भाग लिया था और सभी ने एक साथ काम करने की सहमति प्रदान की थी। इस बैठक में 21 लोगों की एक सहयोग समन्वय समिति का गठन भी किया गया था। हमने 4 बिन्दुओं पर सहमति बनायी थी जो निम्न प्रकार हैं–
1. संविधान और संविधानवाद
2. लोकतांत्रिक पद्धति और संस्थागत नेतृत्व
3. फुले–अम्बेडकरी विचारधारा
4. मूलनिवासी पहचान
एनसीसीएमबीओ की नई सहयोग समन्वय समिति का गठन किया गया जिसमें मुझे राष्ट्रीय संयोजक तथा मू. महादेव कांबले को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. के.एस. चैहान ने ‘संविधान और संविधानवाद’ विषय पर प्रशिक्षण देते हुए बताया कि भारत के संविधान में सभी व्यक्तियों को बाराबरी का अधिकार दिया गया है, चाहे वे पुरूष हों या महिला। संविधान में ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो सामाजिक और शैक्षिक तौर पर पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व की बात करते हैं।
लोकतांत्रिक पद्धति और संस्थागत नेतृत्व पर एनसीसीएमबीओ की रिसर्च कमेटी के चेयरमैन मू. एस.आर. मौर्य ने कहा कि साथियों, आज हमारा लोकतंत्र खतरे में है। भारत के संविधान को आज सबसे बड़ा खतरा ब्राह्मणवादियों से है। वे न्यायपालिका के माध्यम से लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं। अभिजीत भगत ने फुले–अम्बेडकरी विचारधारा पर प्रशिक्षित करते हुए कहा कि भारत में फुले–अम्बेडकरी विचारधारा का प्रखर आंदोलन चला जिसका हमारे देश पर बहुत बड़ा असर हुआ। आज पक्ष और विपक्ष फुले–अम्बेडकरी विचारधारा की बात करने लगा है।
बामसेफ के वरिष्ठ कार्यकर्ता भानजी भाई राठौर ने मूलनिवासी पहचान के संदर्भ में प्रशिक्षित करते हुए कहा कि बाबासाहेब, फुले साहब की मूलनिवासी पहचान की थ्योरी तथा डीएनए की रिपोर्ट को एक साथ लेकर हमें मूलनिवासी पहचान को समाज में और अधिक मजबूत करना होगा।
डॉ. संजय इंगोले ने सांगठनिक व्यवहार पर उपस्थित साथियों को संबोधित करते हुए कहा कि संगठनात्मक जीवन में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जिन लोगांे को हम शुरूआती दौर में जोड़ते हैं उनके साथ लगातार संपर्क और संवाद बनाये रखना चाहिए, ताकि उनसे सौहार्द या अपनापन सदैव बना रहे।
‘लोकतांत्रिक राज्य समाजवाद’ के विषय पर डॉ. विकास जंभूलकर ने प्रशिक्षित करते हुए बताया कि बाबासाहेब ने संविधान सभा के सामने ‘राज्य और अल्पसंख्यक’ का प्रस्ताव रखा था और राज्य की अर्थ व्यवस्था में राज्य का हस्तक्षेप होना चाहिए, यह सुझाव दिया था।
इस दौरान एनसीसीएमबीओ की बैठक में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन निर्णयों की जानकारी देते हुए एनसीसीएमबीओ के राष्ट्रीय महासचिव, महादेव कांबले ने बताया कि एनसीसीएमबीओ के सभी सदस्य 50 संगठनों की सूची एकत्रित करके एनसीसीएमबीओ को सौंपेगे, तथा इन संगठनों को एनसीसीएमबीओ में शामिल होने के लिए आमंत्रण पत्र देंगे और इन संगठनों से सहमति पत्र भी लेंगे।
उपरोक्त मांग के साथ–साथ ओबीसी जनगणना, जाति आधारित जनगणना, अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न के विरोध में पूरे देश में मूलनिवासी बहुजन समाज के संगठनों के साथ सहयोग समन्वय स्थापित करते हुए राष्ट्रपति को ज्ञापन दिए जायेंगे। आने वाले समय में मूलनिवासी बहुजन संगठनों के प्रतिनिधियों का एक राष्ट्रीय अधिवेशन भी आयोजित किया जाएगा।
इस चिंतन बैठक व प्रशिक्षण शिविर में मुख्य रूप से बामसेफ, मानव मुक्ति मिशन, भारतीय भीम सेना, देश हितैषी मानवतावादी परिषद, भारतीय स्वयं सेवक संघ, सामाजिक न्याय मोर्चा, मूलनिवासी सभ्यता संघ, भारत संगठन, भारतीय कर्मचारी संघ, मूलनिवासी संघ, भारतीय स्वाभिमानी संघ, भारतीय संविधान प्रचारिणी सभा, नेशनल यूनाईटेड फ्रंट ऑफ इंडिया, भारतीय शूद्र संघ, संविधान सुरक्षा समिति, संविधान संरक्षण समिति, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, बहुजन समाज पार्टी, पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) इत्यादि संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
प्रतिनिधियों में मुख्यत: मू. अमर सिंह, मू. अशोक गजभिये, मू. मनिक वानखेड़े, मू. धनीराम बंजारे, मू. चित्रा गायकवाड़, मू. जनाबाई सूर्यकांत डोंगरे, मू. सूरेखा वाघमारे, मू. भगवानदीन सोंधिया, मू. गगन बनसोड़, मू. डॉ. विश्वजीत सिंह, मू. राकेश कृष्णा कांबले, मू. मनोज पिसे, मू. ए.बी. मर्सकोले, मू. एड. पंकज राव गौतम, मू. राजेश इंगले, मू. डॉ. अनिल कुमार नागबुद्धा, मू. डॉ. श्रीकांत मेश्राम, मू. विट्ठल सुधाकर दांडगे, मू. घनश्याम चन्द्रभान अलामे, मू. अभिजीत भगत, मू. केतन देशमुख, मू. बालासाहब मुरलीधर देशाई, मू. डॉ. धर्मकीर्ति परभणीकर, मू. ईं. राजश्री इंगले, मू. प्रशान्त जानराव जी ठमके, मू. माधुरी चन्द्र किरण कोंटागले, मू. अक्षय कांबले, मू. मानोज पंडरी निकोसे, मू. राकेश कांबले, मू. अशीष जांबूलकर, मू. प्रशान्त जय कांबले, मू. राहुल मडामे, मू. संजय बोरकर, मू. प्रवीण चंद्रिका पुरे, मू. अरूणा तिरपुड़े, मू. प्रो. एस.डी. तिरपुड़े, मू. प्रो. मधुकर मेश्राम, मू. आर.के. विद्यार्थी, मू. दिलीप अंबेडकर, मू. राजा गौतम, मू. दिनेश मेश्राम, मू. दुष्यंत पाटिल आदि उपस्थित रहे।

