नई टिहरी केतन लाल हत्याकांड को लेकर जिला मुख्यालय पर चल रहे आंदोलन की लगातार ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार आशु कवि को 30 अगस्त को चैनल से हटाए जाने और इसके अगले दिन 31 अगस्त को धरना समाप्त होने की घटनाओं की टाइमिंग को लेकर सवाल उठे हैं। पत्रकार ने दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध का दावा नहीं किया है, लेकिन परिस्थितियों को लेकर संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण की मांग की है।
पत्रकार के अनुसार, उन्होंने 24 अगस्त से केतन लाल प्रकरण से जुड़े घटनाक्रम की लगातार रिपोर्टिंग की। इस दौरान जिला मुख्यालय पर चल रहे धरने, परिजनों की मांगों, पुजारी-शिल्पकार समाज के प्रदर्शन और आंदोलन से जुड़े अन्य घटनाक्रमों को समाचारों के माध्यम से सामने रखा गया।
आशु कवि का कहना है कि 30 अगस्त को उन्हें अचानक चैनल से हटा दिया गया। उनके मुताबिक, उन्हें हटाए जाने का स्पष्ट कारण उन्हें नहीं बताया गया। इसके अगले दिन, 31 अगस्त को न्याय की मांग को लेकर चल रहे धरने के समाप्त होने का घटनाक्रम सामने आया।
‘संबंध का दावा नहीं, लेकिन स्पष्टीकरण जरूरी’
पत्रकार ने कहा कि वह इन दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रकार के संबंध का आरोप नहीं लगा रहे हैं। उनका कहना है कि दो लगातार दिनों में हुई घटनाओं की टाइमिंग को देखते हुए यह सवाल जरूर उठता है कि क्या दोनों घटनाएं पूरी तरह असंबंधित थीं।
उन्होंने संबंधित चैनल प्रबंधन और आंदोलन से जुड़े पक्षों से घटनाक्रम की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की मांग की है।
तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्टिंग का दावा
आशु कवि ने कहा कि किसी व्यक्ति, संस्था या अधिकारी पर बिना प्रमाण साजिश, दबाव अथवा हस्तक्षेप का आरोप लगाना उनका उद्देश्य नहीं है। उनका कहना है कि पत्रकारिता का दायित्व उपलब्ध तथ्यों, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर जनता के सामने पूरी तस्वीर रखना है।
उन्होंने कहा कि “मेरी नौकरी गई है, पत्रकारिता नहीं।” उनका कहना है कि केतन लाल प्रकरण से जुड़े सवालों की रिपोर्टिंग आगे भी तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर जारी रखेंगे।
नोट: चैनल प्रबंधन, प्रशासन और आंदोलन से जुड़े अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना आवश्यक होगा, ताकि सभी संबंधित पक्षों का पक्ष प्रकाशित हो सके।

