कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) गढ़वाल के स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम अध्याय 6 सितंबर 1932 पौड़ी क्रांति दिवस की 94वीं वर्षगांठ पर शैलशिल्पी विकास संगठन 6 सितम्बर 2026 को कोटद्वार में 9वें शैलशिल्पी पराक्रम दिवस समारोह का आयोजन करने जा रहा है।
यह समारोह न केवल 6 सितम्बर 1932 की ऐतिहासिक घटना को स्मरण करता है, बल्कि उत्तराखण्ड रत्न, कर्मवीर जयानन्द भारतीय जी के अदम्य साहस और त्याग को भी नमन करेगा।
6 सितम्बर 1932 को पौड़ी में अंग्रेजों के पिठ्ठू संगठन ‘अमन सभा’ द्वारा तत्कालीन संयुक्त प्रान्त के गवर्नर मेलकम हैली का अभिनन्दन समारोह आयोजित किया गया था। ठीक उसी क्षण जब गवर्नर मंच पर भाषण देने के लिए खड़ा होगा तभी कर्मवीर जयानन्द भारतीय भीड़ को चीरते हुए तिरंगा लहराते हुए मंच पर पहुँचे और गर्जना करते हुए नारे लगाए – “गो बैक मेलकम हैली, भारत माता की जय!” इस अद्वितीय साहस के कारण भगदड़ मच गई और गवर्नर को भागना पड़ा। इस घटना ने पूरे गढ़वाल में स्वतंत्रता की चिंगारी भड़का दी और इसे इतिहास में ‘पौड़ी क्रांति दिवस’ के रूप में अमर बना दिया।
कर्मवीर जयानन्द भारतीय को इस साहस के लिए एक वर्ष का कारावास भी भुगतना पड़ा।
इसी गौरवशाली विरासत को जीवन्त रखने के उद्देश्य से शैलशिल्पी विकास संगठन विगत 9 वर्षों से पौड़ी क्रांति दिवस की वर्षगांठ को शैलशिल्पी पराक्रम दिवस समारोह के रूप में मनाता आ रहा है।
कार्यक्रम विवरण-
दिनांक एवं समय: 6 सितम्बर 2026, प्रातः 10:00 बजे से
स्थान: इनविटेशन होटल, देवी रोड कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड
सहभोज: दोपहर 2:00 बजे
मुख्य अतिथि: सुरेन्द्र सिंह नेगी, पूर्व कैबिनेट मंत्री, उत्तराखण्ड सरकार
अध्यक्षता: जोगाराम, सह सम्पादक, शिल्पकार टाइम्स
शैलशिल्पी कर्मवीर जयानन्द भारतीय स्मृति सम्मान 2026 से विभूषित किये जाएंगे –
किशोर हयुमन, स्वतन्त्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता (पिथौरागढ़)
विशिष्ट अतिथियों में मनुली देवी (पुत्रवधू कर्मवीर जयानन्द भारतीय), नरेन्द्र भारतीय (पौत्र), विनोद कुमार (सहायक निदेशक, शहरी विकास विभाग), मदन कुमार शिल्पकार, रघुनाथ लाल आर्य, इन्द्रेश मैथुरी, जगदीश राठी, ओमप्रकाश भारतीय आदि शामिल रहेंगे।
इस अवसर पर संगठन द्वारा प्रकाशित होने वाली स्मारिका का लोकार्पण भी किया जाएगा, जिसमें पौड़ी क्रांति, कर्मवीर जयानन्द भारतीय के जीवन संघर्ष तथा गढ़वाल के स्वतंत्रता संग्राम के दुर्लभ दस्तावेज संकलित होंगे।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विकास कुमार आर्य ने कहा कि “6 सितम्बर 1932 का दिन केवल इतिहास का एक पृष्ठ नहीं, बल्कि गढ़वाल की आत्मा का प्रतीक है। हमारा कर्तव्य है कि नई पीढ़ी को इस क्रांति की गाथा से अवगत कराएँ और कर्मवीर जयानन्द भारतीय जैसे महानायकों को यथोचित सम्मान दिलाएँ।”
सभी देशभक्तों, स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों, सामाजिक संगठनों, मीडिया बन्धुओं एवं आम नागरिकों से अनुरोध है कि इस ऐतिहासिक समारोह में सम्मिलित होकर गढ़वाल की क्रांतिकारी विरासत को नमन कीजियेगा।

