घनसाली (नई टिहरी) बहुचर्चित केतन लाल प्रकरण को लेकर न्याय की लड़ाई अब गांव-गांव पहुंचने लगी है। इसी क्रम में प्रतापनगर क्षेत्र से आंदोलन से जुड़े लोग और स्थानीय जनता पत्रकार एवं कवि गंगा शाह ‘आशु कवि’ के पैतृक आवास पहुंची। इस दौरान केतन लाल प्रकरण, जारी अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन, दिवाकर डिमरी से जुड़े मामले और आगे की कानूनी लड़ाई को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
मुलाकात के दौरान प्रतापनगर से पहुंचे लोगों ने कहा कि केतन लाल के परिजन और आंदोलन से जुड़े लोग जिला न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय तक न्याय की लड़ाई को मजबूती से लड़ना चाहते हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त कानूनी सहयोग और संसाधन नहीं हैं।
उन्होंने उत्तराखंड के शिल्पकार समाज, अधिवक्ताओं, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों से आगे आकर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर कानून के दायरे में उचित न्यायिक कार्रवाई में सहयोग करने की अपील की।
“क्या पहाड़ का शिल्पकार और पूजारी समाज अब भी खामोश रहेगा?”
मुलाकात के दौरान आंदोलनकारियों ने कहा कि पहाड़ का शिल्पकार और पूजारी समाज न्याय से जुड़े गंभीर सवालों पर लंबे समय तक चुप नहीं रह सकता। उन्होंने समाज के अधिवक्ताओं, बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से आगे आने का आह्वान करते हुए कहा—
“क्या पहाड़ का शिल्पकार और पूजारी समाज अब भी खामोश रहेगा?”
प्रतापनगर की जनता का कहना था कि यह संघर्ष किसी जाति या समाज के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्याय और निष्पक्ष जांच के लिए है। उन्होंने कहा कि केतन लाल के परिजनों को न्याय मिलना चाहिए और दिवाकर डिमरी से जुड़े मामले में भी जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के अनुसार आगे बढ़नी चाहिए।
इंद्रेश मैखुरी ने दिया अनिश्चितकालीन धरने को समर्थन
इस बीच जनवादी क्रांतिकारी मोर्चा के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने भी आंदोलन के अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन को समर्थन दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि केतन लाल प्रकरण में न्याय की मांग और दिवाकर डिमरी मामले में निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया की मांग को अब व्यापक जनसमर्थन मिलना शुरू हो गया है।
“सत्ता का प्रभाव जांच को प्रभावित न करे”
आंदोलनकारियों ने आशंका जताई कि राजनीतिक प्रभाव, प्रभावशाली लोगों से संबंध या किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव जांच की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि पुलिस और जांच एजेंसियों को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर, बिना किसी राजनीतिक, सामाजिक या व्यक्तिगत दबाव के कार्रवाई करनी चाहिए।
आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा कि यदि प्रभावशाली या सत्तारूढ़ पक्ष से जुड़े व्यक्तियों के संबंधों को लेकर जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं तो उन सवालों को दूर करने की जिम्मेदारी सरकार और जांच एजेंसियों की है।
सरकार से सीधे सवाल
क्या सत्ता से जुड़े लोगों के रिश्तेदार होने भर से जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने चाहिए?
यदि जनता के मन में संदेह है तो उसे दूर करने के लिए जांच एजेंसियां क्या ठोस कदम उठाएंगी?
क्या मुख्यमंत्री निष्पक्ष और किसी भी प्रभाव से मुक्त जांच का सार्वजनिक भरोसा देंगे?
“केतन को न्याय, दिवाकर मामले में निष्पक्षता—यही आंदोलन की मांग”
प्रतापनगर की जनता और आंदोलनकारियों का कहना है कि न्याय की लड़ाई किसी एक समुदाय की नहीं है। यदि केतन लाल के परिजन अपने बेटे के लिए न्याय मांग रहे हैं तो उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। वहीं दिवाकर डिमरी के मामले में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया की मांग भी कानून के दायरे में पूरी गंभीरता से सुनी जानी चाहिए।
प्रतापनगर से पहुंचे लोगों ने कहा कि अब आंदोलन को केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से न्याय की लड़ाई को भी मजबूत किया जाएगा।
अब सवाल साफ है—क्या सरकार और प्रशासन जनता के सवालों का जवाब देंगे, या आंदोलन की यह आवाज गांव-गांव और तेज होगी?
आंदोलन का संदेश
“अब खामोशी नहीं… जवाब चाहिए।
केतन के लिए न्याय चाहिए।
दिवाकर मामले में निष्पक्ष जांच चाहिए।
और सत्ता के प्रभाव से मुक्त कानून चाहिए।”
गंगा शाह ‘आशु कवि’, पत्रकार | घनसाली/नई टिहरी

