नई टिहरी केतन लाल प्रकरण में न्याय की मांग को लेकर 24 अगस्त 2026 से जिला मुख्यालय पर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। धरने के समर्थन में पूजारी और शिल्पकार समाज के साथ बड़ी संख्या में लोग जिला मुख्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए घेराव किया।
जिला मुख्यालय पर उमड़े जनसैलाब के बीच आंदोलनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्याय की मांग को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने तत्काल वार्ता कर मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
“पुलिस ने मेरे कपड़े फाड़े और धक्का-मुक्की की”
धरने पर बैठे केतन लाल के पिता ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पुलिस बल के साथ हुई कार्रवाई के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। पिता का आरोप है कि उन्हें डराने और दबाव में लेने का प्रयास किया गया।
इन आरोपों के सामने आने के बाद आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
मातृशक्ति के साथ कथित बदसलूकी ने बढ़ाया आक्रोश
आंदोलनकारियों का आरोप है कि केतन लाल के परिवार के समर्थन में प्रतापनगर से पहुंची मातृशक्ति के साथ भी कथित तौर पर बदसलूकी की गई।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग धरना स्थल पर जबरन घुसे और वहां धरने पर बैठी शिल्पकार एवं पूजारी समाज की महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया। इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
दिवाकर डिमरी की रिहाई और छह मांगों पर आर-पार
आंदोलनकारियों ने दिवाकर डिमरी की रिहाई तथा परिजनों की छह मांगों को लेकर सरकार के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उनका कहना है कि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन का दायरा जिला मुख्यालय से आगे तक बढ़ाया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि “अब केवल आश्वासन नहीं, लिखित और ठोस कार्रवाई चाहिए।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही और परिस्थितियां बिगड़ती हैं तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
24 अगस्त से दिन-रात धरना, फिर भी इंतजार खत्म नहीं
आंदोलनकारियों के अनुसार वे 24 अगस्त से लगातार दिन-रात धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि इतने दिनों से आंदोलन जारी रहने के बावजूद उनकी मांगों पर अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई।
धरने पर बैठे लोगों ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे लोगों के साथ संवाद किया जाना चाहिए। सरकार को आंदोलनकारियों को केवल आश्वासन देने के बजाय उनकी प्रत्येक मांग पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
एक मंच पर पूजारी और शिल्पकार—“अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं रुकेगी”
जिला मुख्यालय पर पूजारी और शिल्पकार समाज की एकजुटता ने आंदोलन को नया तेवर दे दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक परिवार की आवाज नहीं है, बल्कि न्याय, सम्मान और अधिकारों की आवाज है।
आंदोलनकारियों ने ऐलान किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
अब नजर सरकार के अगले कदम पर
जिला मुख्यालय पर भारी जनसैलाब और लगातार जारी धरने के बाद अब सवाल यह है कि सरकार आंदोलनकारियों से सीधे संवाद कर समाधान की पहल करेगी या आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा।
आंदोलनकारियों का संदेश साफ है—
“मांगें सुनी जाएं, न्याय मिले और सम्मान के साथ समाधान हो—वरना आंदोलन जारी रहेगा।”
— गंगा शाह ‘आशु कवि’
पत्रकार, नई टिहरी

