रुद्रप्रयाग अंमसारी क्षेत्र में आपसी कहासुनी के बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। मारपीट के दौरान मदन लाल की गर्दन पर कांच की बोतल से हमला किए जाने का आरोप सामने आया है। गंभीर रूप से घायल मदन लाल को उपचार के लिए बेस अस्पताल श्रीनगर में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसी बात को लेकर हुई कहासुनी के बाद विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इसी दौरान राका बिष्ट, जयपाल सिंह समेत उनके साथियों ने मदन लाल पर कांच की बोतल से वार किया, जिससे उनकी गर्दन पर चोट आई।
घटना के बाद घायल मदन लाल को तत्काल बेस अस्पताल श्रीनगर पहुंचाया गया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिजनों और क्षेत्रवासियों में आक्रोश है।
पुलिस जांच में जुटी
मामले को लेकर पुलिस में शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस घटना की परिस्थितियों, विवाद के कारणों और लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही हमले की वास्तविक स्थिति और आरोपित बताए जा रहे लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
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क्या उत्तराखंड में कमजोर तबके की सुरक्षा पर उठ रहे हैं सवाल?
रुद्रप्रयाग की घटना ने फिर गरमाया सामाजिक न्याय का मुद्दा; सेवानिवृत्त जिला जज कांता प्रसाद ने व्यवस्था पर साधा निशाना
रुद्रप्रयाग में मदन लाल के साथ हुई मारपीट और गर्दन पर बोतल से हमला किए जाने के आरोप ने केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
उत्तराखंड को शांत और सामाजिक सद्भाव वाला राज्य माना जाता है। लेकिन जब किसी व्यक्ति पर हिंसक हमले के आरोप सामने आते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या पीड़ित को बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच और न्याय मिल रहा है?
यदि किसी मामले में जातीय उत्पीड़न या भेदभाव का आरोप भी सामने आता है, तो उसकी जांच सामान्य मारपीट के मामले की तरह नहीं, बल्कि संबंधित कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप गंभीरता से किए जाने की जरूरत होती है।
इसी संदर्भ में सेवानिवृत्त जिला जज कांता प्रसाद ने सरकार और व्यवस्था पर सीधा निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सामाजिक रूप से कमजोर तबकों के मामलों में प्रशासन की संवेदनशीलता और पुलिस की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कायम रहना बेहद जरूरी है।
सवाल सरकार से भी—कार्रवाई कब और कितनी निष्पक्ष?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के सामने भी यह सवाल है कि राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति जमीन पर कितनी प्रभावी दिखाई देती है।
हालांकि रुद्रप्रयाग की घटना में लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी, लेकिन किसी भी नागरिक के साथ हिंसा का आरोप सामने आते ही निष्पक्ष जांच और पीड़ित को सुरक्षा देना शासन-प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
सवाल यह नहीं कि पीड़ित किस जाति या समुदाय से है।
सवाल यह है कि कानून की नजर में हर नागरिक बराबर है या नहीं?
और यदि कोई व्यक्ति हिंसा का शिकार हुआ है, तो उसे न्याय पाने के लिए कितनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी?
कानून का राज ही भरोसे की असली कसौटी
रुद्रप्रयाग की घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि सामाजिक न्याय केवल सरकारी घोषणाओं और भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसकी वास्तविक परीक्षा तब होती है, जब कोई कमजोर व्यक्ति पुलिस और प्रशासन के दरवाजे पर न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचता है।
मदन लाल फिलहाल बेस अस्पताल श्रीनगर में उपचाराधीन हैं। अब निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर हैं।
निष्पक्ष जांच होगी, आरोपों की सच्चाई सामने आएगी और दोषी पाए जाने वालों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी—यही पीड़ित और समाज की सबसे बड़ी अपेक्षा है।
नई टिहरी संवाददाता | गंगा शाह

