देहरादून प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी एवं सामाजिक संगठनों द्वारा 23 जून 2026 को 19 सूत्रीय मांगों को लेकर सचिवालय घेराव एवं हुंकार रैली की गई थी। आंदोलन के बाद प्रतिनिधिमंडल की माननीय मुख्यमंत्री जी से मुलाकात हुई थी, जिसमें मांगों के समाधान के संबंध में सकारात्मक आश्वासन दिया गया। मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात को अब 50 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन 19 सूत्रीय मांगों पर अपेक्षित ठोस निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों और संबंधित वर्गों में चिंता बनी हुई है।
इन मांगों में आरक्षण एवं रोस्टर व्यवस्था, बैकलॉग पदों की पूर्ति, पदोन्नति में आरक्षण, छात्रवृत्ति, स्थानांतरण व्यवस्था, पुरानी पेंशन सहित कर्मचारी एवं सामाजिक न्याय से जुड़े महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इन मांगों का प्रभाव केवल किसी एक संगठन या विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कर्मचारियों एवं वंचित वर्गों से जुड़े व्यापक हितों पर पड़ता है।
अनु0 जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन, उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राठी ने कहा कि कर्मचारी संगठनों ने लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखी थीं। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद यह अपेक्षा बनी थी कि संबंधित विभागों को निर्देश देकर मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर रहकर समाधान के पक्षधर हैं। इसलिए सरकार से अपेक्षा है कि मुख्यमंत्री स्तर पर दिए गए आश्वासन को विभागीय कार्रवाई और शासनादेश के रूप में धरातल पर उतारा जाए।
राठी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से अपनी समस्याओं के समाधान की अपेक्षा रखना कर्मचारियों का वैधानिक एवं संवैधानिक अधिकार है। 50 दिन बीतने के बाद अब आवश्यक है कि 19 सूत्रीय मांगों की विभागवार समीक्षा कर प्रत्येक बिंदु पर स्पष्ट एवं समयबद्ध निर्णय लिया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की “सबका साथ, सबका विकास” की भावना तभी सार्थक होगी, जब शासन की नीतियों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति और कर्मचारी वर्ग तक समयबद्ध एवं न्यायसंगत रूप से पहुंचे।
जगदीश राठी
प्रदेश अध्यक्ष
अनु0 जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन, उत्तराखण्ड

