नई टिहरी टिहरी गढ़वाल के बहुचर्चित केतन लाल हत्याकांड में पीड़ित परिवार न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए सरकारी खर्च पर अधिवक्ता उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर मूलनिवासी शिल्पकार परिवार का आरोप है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल को प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन अब तक अधिवक्ता नियुक्ति के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
परिजनों का कहना है कि आर्थिक तंगी के बावजूद वे अपने बेटे के मामले में न्याय की लड़ाई लड़ना चाहते हैं, लेकिन जरूरी कानूनी सहायता नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ रही है। परिवार के मुताबिक, प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है।
समाज कल्याण मंत्री खजान दास से लगाई गुहार
जिलाधिकारी कार्यालय से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित परिवार ने प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री खजान दास से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी। परिजनों ने मंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने और एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत सरकारी खर्च पर अधिवक्ता उपलब्ध कराने की मांग की।
परिवार चाहता है कि उसके प्रार्थना पत्र पर नियमानुसार शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि आर्थिक कमजोरी न्याय की लड़ाई में बाधा न बने। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं।
एससी-एसटी एक्ट के मामलों में सौतेले व्यवहार का सवाल
सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश कांता प्रसाद ने एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामलों में पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ऐसे मामलों में पीड़ितों के साथ कथित सौतेले व्यवहार के मुद्दे को गंभीरता से लेने की आवश्यकता बताई।
उनके विचारों के संदर्भ में यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि अनुसूचित जाति के पीड़ित परिवारों को कानून के तहत उपलब्ध अधिकारों और कानूनी सहायता का लाभ समय पर मिल रहा है या नहीं। न्याय की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पीड़ितों को प्रभावी कानूनी सहायता उपलब्ध कराना व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
गरीब शिल्पकार परिवार को न्याय के लिए कब मिलेगी मदद?
केतन लाल प्रकरण ने पीड़ित परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और सरकारी तंत्र की जवाबदेही से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है। जब किसी परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो, तो सरकारी कानूनी सहायता उसके लिए न्याय कीi लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
परिजनों का सवाल है—क्या पहाड़ में गरीब मूलनिवासी शिल्पकार होना गुनाह है? आखिर न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए जरूरी कानूनी सहायता कब मिलेगी?
अब निगाहें जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग पर टिकी हैं। पीड़ित परिवार को कानूनी सहायता कब मिलेगी और अधिवक्ता नियुक्ति के आवेदन पर क्या निर्णय लिया जाएगा, यह आने वाला समय बताएगा। मामले में प्रशासन का पक्ष भी सामने आना जरूरी है, ताकि कार्रवाई में देरी के कारण स्पष्ट हो सकें।
नई टिहरी संवादाता UCN गंगा शाह

