देहरादून उत्तराखंड सरकार द्वारा करवा चौथ के पावन पर्व पर केवल महिलाओं के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने को लेकर कर्मचारियों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। अनुसूचित जाति-जनजाति शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री सुरेश चंद्र ने सरकार के इस आदेश को ‘अजब-गजब’ और हास्यास्पद करार देते हुए इस पर गहरी नाराजगी जताई है।
प्रदेश महामंत्री सुरेश चंद्र ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सरकार का यह आदेश पूरी तरह से अव्यवहारिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि करवा चौथ के इस पवित्र व्रत में केवल महिलाओं के लिए अवकाश का प्रावधान करना और पुरुषों के लिए किसी भी प्रकार की छुट्टी का न होना, पति-पत्नी के रिश्ते और इस पर्व की मूल भावना के साथ न्याय नहीं है।
कैसे टूटेगा उन पत्नियों का व्रत?
सुरेश चंद्र ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई सरकारी कर्मचारी अपने गृह क्षेत्र से दूर अन्य जनपदों या स्थानों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में जो पुरुष कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर हैं और जिन्हें अवकाश नहीं मिल रहा, उनकी पत्नियां जो अपने पतियों से दूर हैं, वे अपना व्रत कैसे और किसके साथ पूरा करेंगी? गृह क्षेत्र से दूर रह रहे कर्मचारियों के लिए इस आदेश में किसी भी प्रकार की राहत या अवकाश का प्रावधान न होना सरकार की अदूरदर्शिता को दर्शाता है।
महिला और पुरुष दोनों के लिए हो अवकाश
एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री ने मांग की है कि ऐसे संवेदनशील और पारिवारिक त्योहारों पर शासन को दोनों (महिला और पुरुष) कर्मचारियों के लिए अवकाश का प्रावधान करना चाहिए था, ताकि परिवार एक साथ मिलकर इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मना सकें। उन्होंने सरकार से मांग की है कि भविष्य में इस प्रकार के आदेशों में सुधार किया जाए ताकि कर्मचारियों और उनके परिवारों को किसी प्रकार की मानसिक असुविधा या परेशानी का सामना न करना पड़े।
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