कोटद्वार (गढ़वाल) 11 अप्रैल 1827 को उन्नीसवीं सदी के प्रारंभिक चरण में महाराष्ट्र में जन्में क्रांतिकारी समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले जी की 199वीं जयंती के अवसर पर आज शैलशिल्पी विकास संगठन द्वारा सिम्मलचौड़ स्थित उत्तराखंड रत्न,कर्मवीर जयानंद भारतीय स्मृति पुस्तकालय में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई,
संगठन के अध्यक्ष विकास कुमार आर्य ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने स्त्री-शिक्षा, विधवा-पुनर्विवाह, जातीयता का निर्मूलन, किसान और कामगारों के जीवन में मूलभूत परिवर्तन लाने जैसे समाज-सुधारों के लिये अपना पूरा जीवन लगाया इसीलिये वे सामाजिक क्रांति के अग्रदूत कहे जाते हैं,
उन्होंने सामाजिक समता, धार्मिक सहिष्णुता, आर्थिक न्याय और शोषण मुक्ति के लिये जीवन के अंतिम क्षण तक संघर्ष किया, वे आधुनिक महाराष्ट्र के महान समाजचिंतक हुये जिन्होंने किसान,श्रमिक ,बहुजन समाज ,दलित और महिलाओं पर हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, रूढ़िवादी विचारों पर तथ्यात्मक आलोचना का चाबुक चलाया तथा विभिन्न जातियों और पंथों के लोगों को भाईचारे की सीख दी,
उनकी धारणा थी कि शिक्षा हर दृष्टि से सभी सुधारों का प्रवेशद्वार है इसलिये उन्होंने शूद्रों,अतिशूद्रों तथा महिलाओं के लिये अपने संघर्षों से शिक्षा के द्वार खुलवाए उनके सभी सामाजिक कार्यों में उनकी धर्मपत्नी माता सावित्रीबाई फुले ने सदैव कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया, आर्य ने कहा कि शैलशिल्पी विकास संगठन भारत सरकार से माँग करता है कि महात्मा ज्योतिबा फुले को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया जाय। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य मनवर लाल भारती ने कहा कि महात्मा फुले ने शिक्षा को वंचित समाज तक पहुंचाने के लिये आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया व धार्मिक शोषण के खिलाफ गुलामगिरी जैसी ऐतिहासिक पुस्तक की रचना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत प्रधानाचार्य मनवर लाल भारती एवं संचालन विकास कुमार आर्य ने किया इस अवसर पर शिवकुमार, केसीराम निराला, मनवर लाल भारती, प्रमोद चौधरी, मनोज सिंह, गीता सिंह, एडवोकेट जीवन कुमार जोनी, अनुज चौधरी, शिवम् भूषण शाह, सोमपाल, विनोद कुमार, हर्ष कुमार आदि लोग मौजूद रहे।
प्रेषक-
विकास कुमार “आर्य”
(प्रदेश अध्यक्ष)
मुख्यालय – शैलशिल्पी विकास संगठन कोटद्वार गढ़वाल (उत्तराखंड)



