पौड़ी (गढ़वाल) दिनांक 4 जून को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मंडल मुख्यालय पौड़ी पधारने पर शैलशिल्पी विकास संगठन की विशेष अपील सबसे पहले पौड़ी बस अड्डे पर स्थापित स्वतंत्रता संग्राम सैनानी कर्मवीर जयानंद भारतीय की मूर्ति पर माल्यार्पण करे राहुल गांधी, क्योंकि 6 सितम्बर 1932 को पौड़ी में अंग्रेज गवर्नर मैलकन हेली के स्वागत दरबार में जयानंद भारतीय ने अपनी जान हथेली पर रखकर तिरंगा लहराया, मेलकन हेली गौ बेक, भारत माता की जय, कांग्रेस जिंदाबाद के नारे इसलिए लगाए थे क्योंकि वो अंग्रेजी हुकूमत को ये संदेश देना चाहते थे कि गढ़वाल में कांग्रेस जिंदा है।
राहुल गांधी
दिनांक 4 जून को आप पौड़ी आ रहे हैं, तो कृपया अपनी इस यात्रा को महज एक राजनीतिक कार्यक्रम न बनने दें, सबसे पहले पौड़ी बस अड्डे पर विराजमान गढ़वाल में स्वतंत्रता संग्राम की बुझती लौ को क्रांति की ज्वाला बनाने वाले अमर सेनानी कर्मवीर जयानंद भारतीय की मूर्ति के चरणों में झुकिएगा उनकी मूर्ति पर फूल चढ़ाइएगा और श्रद्धा से माल्यार्पण कीजिएगा।
6 सितंबर 1932 पौड़ी क्रांति के नायक कर्मवीर जयानंद भारतीय गढ़वाल में भारत की स्वतंत्रता क्रांति का वो नाम जो भुलाया नहीं जा सकता
6 सितंबर 1932 को गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी मे अंग्रेज गवर्नर मेलकन हेली का स्वागत करने के लिए अमन सभा (जो उस समय अंग्रेज परस्त तत्वों का संगठन था) ने भव्य स्वागत दरबार का आयोजन किया था।
पूरा प्रशासनिक अमला, अंग्रेजी हुकूमत के समर्थक और डरे हुए हजारों स्थानीय लोग इकट्ठा थे, माहौल में भय और चापलूसी का मिला-जुला वातावरण था।
तभी कोटद्वार से पैदल 105 किलोमीटर की कठिन यात्रा तय करके कर्मवीर जयानंद भारतीय भेष बदलकर अंग्रेज गवर्नर मैलकन हेली के स्वागत दरबार में पौड़ी पहुंचे,उन्होंने बिना किसी हिचक के स्वागत दरबार के बीच में पहुंचकर तिरंगा झंडा लहराया और गरजकर नारे लगाए “मेलकन हेली गो बैक”
“भारत माता की जय”
“कांग्रेस जिंदाबाद”
उस एक क्षण में पूरे स्वागत दरबार का माहौल बदल गया, अंग्रेजी हुकूमत की गरिमा धूल में मिल गई, जयानंद भारतीय ने अपनी जान हथेली पर रखकर साबित कर दिया कि गढ़वाल की धरती पर कांग्रेस मरी नहीं है—वह जिंदा है, सांस ले रही है और लड़ रही है।
अगर उस दिन अमन सभा का यह स्वागत दरबार सफल हो जाता, तो इतिहास में गढ़वाली कौम पर राष्ट्रद्रोह का कलंक लग जाता, जयानंद भारतीय ने अपनी अकेली हिम्मत से पूरे गढ़वाल की गरिमा और राष्ट्रभक्ति को बचाया, उन्होंने सिद्ध किया कि गढ़वाल के लोग गुलामी के पक्षधर नहीं, बल्कि स्वाधीनता के सच्चे सिपाही हैं।
यह कोई छोटा सा विरोध प्रदर्शन नहीं था,यह जान की बाजी लगाकर किया गया एक ऐतिहासिक पराक्रम था।
दुख की बात यह है कि आजादी के इतने साल बाद भी कर्मवीर जयानंद भारतीय को वह सम्मान नहीं मिल पाया जो उन्हें मिलना चाहिए था, उनकी याद आज भी कई लोगों के लिए सिर्फ एक नाम भर रह गई है, जबकि उन्हें गढ़वाल की क्रांतिकारी विरासत का प्रतीक बनना चाहिए था।
4 जून को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पौड़ी आ रहे हैं ,यह सुनहरा अवसर है,पौड़ी बस अड्डे पर जयानंद भारतीय की जो मूर्ति स्थापित है, वह सिर्फ पत्थर की मूर्ति नहीं है—वह उस बलिदान की याद है जिसने गढ़वाल को राष्ट्रद्रोही कहलाने से बचाया।
शैलशिल्पी विकास संगठन राहुल गांधी से अपील करता है कि, वे पौड़ी पहुंचते ही सबसे पहले कर्मवीर जयानंद भारतीय की मूर्ति पर माल्यार्पण करें, यह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा, यह कांग्रेस का इतिहास, गढ़वाल की वीरता और उन हजारों ज्ञात-अज्ञात क्रांतिकारियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने अपनी जान देकर तिरंगे के मान को बढ़ाया।
जयानंद भारतीय ने अपनी जान की परवाह किए बिना 6 सितंबर 1932 को ये पराक्रम सिर्फ इसलिए किया क्योंकि वो साबित करना चाहते थे कि गढ़वाल में कांग्रेस जिंदा है, और संपूर्ण गढ़वाल भारत की स्वतंत्रता का पक्षधर है।
आज कांग्रेस के नेतृत्व को यह दिखाना है कि वह उन बलिदानियों को याद रखती है, जिन्होंने कांग्रेस को जिंदा रखा।
राहुल, यह मूर्ति सिर्फ पत्थर की नहीं है,यह उस वीर की मूर्ति है जिसने अपनी जान की परवाह न करते हुए, अंग्रेज गवर्नर मैलकन हेली के स्वागत दरबार को बीच में खंडितकर, तिरंगा लहराकर और “मेलकन हेली गो बैक” का नारा लगाकर गढ़वाल की आत्मा को बचाया था, अगर उस दिन उनका पराक्रम न होता, तो आज गढ़वाली कौम पर राष्ट्रद्रोह का कलंक होता।
आपकी यह एक छोटी सी श्रद्धांजलि उन हजारों गढ़वाली माताओं-बहनों के आंसुओं को सम्मान देगी, जिन्होंने अपने बेटों को देश के लिए खोया,यह उन अनगिनत क्रांतिकारियों की आत्मा को तृप्त करेगी, जिन्हें इतिहास ने भुला दिया।
राहुल गांधी, जयानंद भारतीय ने 6 सितंबर 1932 को अपनी जान हथेली पर रखकर साबित किया था कि “गढ़वाल में कांग्रेस जिंदा है”
अगर आप पौड़ी आगमन पर पौड़ी बस अड्डे पर स्थापित कर्मवीर जयानंद भारतीय की कुर्बानियों को याद कर उनके चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तो आपका ये कदम साबित करेगा कि कांग्रेस अपनी क्रांतिकारी महान विभूतियों को नहीं भूलती।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति आपका ये आदर प्रदर्शित करना गढ़वाल की जनता का दिल जीत सकती है। वे देखेंगे कि कांग्रेस अब भी अपने उन वीर सपूतों को याद करती है, जिन्होंने कांग्रेस को इस पहाड़ की धरती पर बचाया और जिंदा रखा।
यह सिर्फ माल्यार्पण नहीं, बल्कि महान विभूतियों की कुर्बानियों का ऋण चुकाने का अवसर है,यह इतिहास के प्रति न्याय है,यह गढ़वाल के प्रति सच्ची श्रद्धा है।
कर्मवीर जयानंद भारतीय
अमर रहे।
जय भीम,जय संविधान
प्रेषक –
विकास कुमार आर्य
प्रदेश अध्यक्ष
शैलशिल्पी विकास संगठन मुख्यालय – कोटद्वार गढ़वाल उत्तराखंड

