पिथौरागढ़ दिनांक 19 जुलाई 2026 को पिथौरागढ़ के जिला पंचायत सभागार में ‘बामसेफ’ (BAMCEF) जिला इकाई द्वारा एक विशाल ‘क्लस्टर अधिवेशन’ का सफल और ऐतिहासिक आयोजन किया गया। इस वैचारिक महाकुंभ में बामसेफ के सभी अनुषांगिक संगठनों, ब्लॉक कार्यकारिणियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और जागरूक समाजसेवियों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। दिनेश टम्टा ने दिया बामसेफ का परिचय और निजीकरण पर किया प्रहार अधिवेशन के प्रथम सत्र की शुरुआत बेहद वैचारिक और प्रशिक्षण के माहौल में हुई। कार्यक्रम का सबसे पहला और अहम प्रबोधन बामसेफ के राज्य प्रशिक्षण सचिव दिनेश टम्टा का रहा। उन्होंने एक कुशल प्रशिक्षक की भूमिका निभाते हुए उपस्थित जनसमूह को बामसेफ के इतिहास, कार्यप्रणाली और संगठन के दूरगामी उद्देश्यों के बारे में विस्तार से समझाया। इसके बाद उन्होंने प्रथम सत्र के मुख्य विषय “राष्ट्रीयकरण का पैगाम निजीकरण पर लगाम” पर बोलते हुए देश में तेजी से बढ़ रहे निजीकरण के खतरों से जनता को आगाह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैसे पूंजीवाद आम जनता के अधिकारों को निगल रहा है और इसके समाधान के लिए बाबासाहेब की पुस्तक ‘राज्य और अल्पसंख्यक’ का अध्ययन कितना जरूरी है।
डॉ. प्रमोद कुमार के ओजस्वी विचारों ने फूंकी जान
इस पूरे अधिवेशन में दूसरा सबसे प्रभावशाली वक्तव्य नैनीताल हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं ‘वंचित स्वर’ के संपादक डॉ. प्रमोद कुमार का रहा। उन्होंने बहुजन समाज के राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी अधिकारों पर बेहद बेबाक ढंग से अपनी बात रखी। उनके तार्किक और ऊर्जावान भाषण ने सभागार में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर दिया और कार्यक्रम में एक नई ऊर्जा का संचार किया।
अधिवेशन का द्वितीय सत्र मूलनिवासी प्रतिनिधियों का खुला सत्र था, जिसका विषय “मूलनिवासी बहुजन संगठनों की एकता के बुनियादी सिद्धांत और कार्यक्रम” रहा। इस सत्र में फुले-आंबेडकरवादी विचारधारा पर चलने वाले सभी संगठनों को एक मंच पर लाने पर व्यापक चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बामसेफ के राज्य उपाध्यक्ष डॉ. महेश मुरारी ने की, जबकि दूसरे सत्र की अध्यक्षता ‘मूलनिवासी संघ’ के प्रभारी एवं ‘डॉ. अम्बेडकर संयुक्त विकास समिति’ के अध्यक्ष गोपाल राम सिरौला ने की।

