बाजपुर बाजपुर के उत्कर्ष नेगी ने इस बात को हकीकत में बदल दिया है। बचपन से ही 75 प्रतिशत दिव्यांगता और ‘सेरेब्रल पाल्सी’ (मस्तिष्क पक्षाघात) जैसी गंभीर स्थिति का सामना कर रहे उत्कर्ष ने उत्तराखंड पीसीएस (PCS) परीक्षा को क्रैक कर एक मिसाल कायम की है। अब वे राज्य कर अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएँ देंगे।
उत्कर्ष के लिए रोजमर्रा के सामान्य कामकाज, यहाँ तक कि बोलना, चलना और लिखना भी एक कठिन परीक्षा जैसा था, पर उन्होंने इसे कभी अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा वायु सेना स्कूल दिल्ली और रिवरडेल इंटरनेशनल स्कूल बाजपुर से हुई। इसके पश्चात उन्होंने राजकीय महाविद्यालय बाजपुर से अपनी स्नातक (Graduation) और परास्नातक (Post Graduation) की पढ़ाई पूरी की और बिना रुके लगातार प्रशासनिक सेवा के अपने लक्ष्य के लिए प्रयास करते रहे।
इस कठिन सफर की असली रीढ़ उनका परिवार रहा। वायुसेना से सेवानिवृत्त जूनियर वारंट ऑफिसर, उनके पिता लक्ष्मण सिंह नेगी (वर्तमान में एसबीआई बाजपुर में कार्यरत) और अल्मोड़ा से परास्नातक उनकी माता ने उत्कर्ष के सपनों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। माँ ने उच्च शिक्षित होने के बाद भी केवल उत्कर्ष की देखरेख के लिए घर संभाला। साथ ही, दादी, बुआ, चाचा-चाची और भाई-बहनों वाले संयुक्त परिवार के सामूहिक स्नेह ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने का हौसला दिया।
”दृढ़ संकल्प और धैर्य के बल पर दुनिया की किसी भी बाधा को पार कर मनचाहा मुकाम हासिल किया जा सकता है।”
— उत्कर्ष नेगी (राज्य कर अधिकारी) ने
अपनी इस शानदार उपलब्धि पर अपने संयुक्त परिवार, गुरुजनों, चिकित्सकों और सहपाठियों का आभार जताया है। मुश्किलों से घबराकर पीछे हटने वाले युवाओं के लिए उत्कर्ष की यह गौरवगाथा एक नया रास्ता दिखाने वाली और पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित करने वाली है।

