अल्मोड़ा सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व ग्राम प्रधान, भुमका मुकेश चन्द्र बौद्ध ने अल्मोड़ा निवासी रवि टम्टा के इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार यानी उड़ने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ी के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि रवि टम्टा का यह प्रयास उत्तराखंड की उस गौरवशाली शिल्पकार परंपरा की याद दिलाता है, जिसमें हुनर, कल्पना, मेहनत और कुछ नया करने का साहस पीढ़ियों से दिखाई देता रहा है।
मुकेश चन्द्र बौद्ध ने कहा कि शिल्पकार केवल एक नाम नहीं है, बल्कि हुनर, सृजनशीलता, तकनीकी सोच और अपनी कल्पना को वास्तविक रूप देने की क्षमता का प्रतीक है। उत्तराखंड के शिल्पकार समुदाय ने लंबे समय से कृषि उपकरणों, पनचक्कियों, घरों, मंदिरों, धातु के बर्तनों, घंटियों तथा विभिन्न प्रकार की कारीगरी के माध्यम से समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे अनेक व्यक्तित्व हुए हैं, जिन्होंने अपने समय से आगे सोचने का साहस किया। इसी संदर्भ में उन्होंने राय बहादुर मुंशी हरिप्रसाद टम्टा जी का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा और परिवहन के क्षेत्र में उनके प्रयास आज भी प्रेरणा देते हैं।
उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, हरिप्रसाद टम्टा ने शिक्षा के क्षेत्र में कृष्ण डे स्कूल और कृष्ण नाइट स्कूल जैसे प्रयासों को आगे बढ़ाया। साथ ही वर्ष 1920 में हिल मोटर्स ट्रांसपोर्ट कंपनी की शुरुआत से परिवहन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुकेश चन्द्र बौद्ध ने कहा कि जिस दौर में पहाड़ों में आवागमन बेहद कठिन था, उस समय परिवहन की व्यवस्था के बारे में सोचना अपने आप में दूरदृष्टि और साहस का परिचायक था। आज रवि टम्टा का प्रयास उन्हें उसी सृजनशील सोच और नवाचार की परंपरा की याद दिलाता है।
उन्होंने कहा कि रवि टम्टा जिस तकनीक को लेकर चर्चा में हैं, उसे इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार यानी उड़ने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ी के रूप में बताया जा रहा है। यदि भविष्य में ऐसी तकनीक सुरक्षित, विश्वसनीय और व्यावहारिक रूप से विकसित होती है, तो परिवहन के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं और एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में लगने वाला समय कम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि आज सड़क पर चलने वाली गाड़ी यदि भविष्य में हवा में भी सुरक्षित रूप से आवागमन करने की क्षमता हासिल करती है, तो परिवहन की दुनिया में एक नई दिशा खुल सकती है। हालांकि किसी भी नई तकनीक की वास्तविक सफलता का मूल्यांकन उसके परीक्षण, सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और व्यावहारिक उपयोग के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
मुकेश चन्द्र बौद्ध ने कहा कि इसलिए रवि टम्टा के प्रयास को लेकर सवाल और तकनीकी चर्चा अपनी जगह है, लेकिन उनके नवाचार करने के साहस, मेहनत और प्रतिभा को सम्मान की दृष्टि से देखना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर रवि टम्टा के प्रयास को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि आलोचना और सुझाव लोकतांत्रिक समाज का हिस्सा हैं, लेकिन किसी भी नए प्रयास का उपहास करने से पहले यह समझना चाहिए कि—
“कुछ नया सोचने और उसे बनाने का साहस हर व्यक्ति नहीं कर पाता।”
मुकेश चन्द्र बौद्ध ने कहा—
“प्रतिभा किसी जाति की मोहताज नहीं होती, हुनर किसी पहचान का मोहताज नहीं होता और नवाचार किसी सामाजिक सीमा में बंधा नहीं होता।”
उन्होंने कहा कि शिल्पकार समुदाय ने सदियों से मेहनत और हुनर के माध्यम से समाज के निर्माण में योगदान दिया है, लेकिन सामाजिक सम्मान और बराबरी के अवसरों के लिए उसे लंबे समय तक संघर्ष भी करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज व्यक्ति की पहचान से अधिक उसके कर्म, प्रतिभा, मेहनत और योगदान को महत्व दे।
मुकेश चन्द्र बौद्ध ने कहा कि रवि टम्टा का प्रयास केवल एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की उस सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ नया करने का सपना देखती है।
उन्होंने कहा—
“हम यह नहीं कह रहे कि किसी भी नए प्रयास को बिना सवाल किए स्वीकार कर लिया जाए। सवाल और आलोचना तथ्यों और तकनीकी आधार पर होनी चाहिए। लेकिन किसी व्यक्ति के हुनर और प्रयास का मजाक बनाना उचित नहीं है।”
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रवि टम्टा भविष्य में अपने प्रयास को और बेहतर बनाएंगे और यदि यह तकनीक सुरक्षित एवं व्यावहारिक रूप से विकसित होती है, तो यह उनके लिए ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के लिए भी गौरव की बात होगी।
रवि टम्टा को जल्द किया जाएगा सम्मानित
मुकेश चन्द्र बौद्ध ने कहा कि रवि टम्टा को बहुत जल्द सम्मानित भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके हुनर, प्रतिभा, मेहनत और कुछ नया करने के साहस के प्रति सम्मान और प्रोत्साहन का प्रतीक होगा।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती ने हमेशा प्रतिभाओं को जन्म दिया है और समाज की जिम्मेदारी है कि ऐसी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करे, उन्हें अवसर दे और उनकी मेहनत को सम्मान दे।
मुकेश चन्द्र बौद्ध ने कहा—
“हुनर को अवसर मिलना चाहिए, प्रतिभा को सम्मान मिलना चाहिए और मेहनत को पहचान मिलनी चाहिए। उत्तराखंड की शिल्पकार परंपरा केवल हमारा अतीत नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी है।”
उन्होंने रवि टम्टा को उनके प्रयास के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका जज्बा और प्रयास आने वाली पीढ़ी के युवाओं को कुछ नया करने के लिए प्रेरित करेगा।
मुकेश चन्द्र बौद्ध
सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व ग्राम प्रधान, भुमका

