बालगंगा (टिहरी गढ़वाल) टिहरी जनपद की बालगंगा तहसील का सुदूर सीमांत और आपदा की मार झेल चुका तोली गांव एक बार फिर खतरे के मुहाने पर खड़ा है। लगातार हो रही बारिश के बीच गांव के आसपास भूस्खलन और भू-धंसाव की स्थिति ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाल ही में क्षेत्रीय विधायक भी गांव का दौरा कर ग्रामीणों की स्थिति देख चुके हैं, इसके बावजूद खतरा जस का तस बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश बढ़ते ही पहाड़ी से मिट्टी और मलबा खिसकने लगा है। गांव पहले से ही संवेदनशील स्थिति में है और वर्ष 2024 की आपदा के जख्म भी अभी पूरी तरह नहीं भरे हैं। ऐसे में लगातार बारिश ने ग्रामीणों को फिर पुराने भय के बीच खड़ा कर दिया है।
दौरा हुआ, भरोसा मिला… लेकिन सुरक्षा कब?
विधायक के हालिया दौरे से ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि उनकी समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा। लेकिन बरसात के बीच मौजूदा हालात बता रहे हैं कि सिर्फ दौरा और निरीक्षण से पहाड़ का खतरा नहीं टलने वाला।
ग्रामीणों का सवाल सीधा है—जब गांव पहले से आपदाग्रस्त और संवेदनशील है, तो बारिश शुरू होने से पहले ठोस सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए? संवेदनशील ढलानों की निगरानी, भू-वैज्ञानिक जांच और खतरे की जद में रह रहे परिवारों की सुरक्षित व्यवस्था कब होगी?
बड़ी अनहोनी का इंतजार न करे प्रशासन
तोली की स्थिति प्रशासन के लिए चेतावनी है। 2024 की त्रासदी को भूलकर यदि इस बार भी खतरे को केवल निरीक्षण और आश्वासन तक सीमित रखा गया, तो किसी बड़ी घटना की जिम्मेदारी किसकी होगी?
ग्रामीणों ने तत्काल मौके पर विशेषज्ञ टीम भेजने, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कराने, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने और स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाने की मांग की है।
तोली के ग्रामीणों की पुकार साफ है—दौरे बहुत हो चुके, अब सुरक्षा चाहिए। खतरा सिर पर है, प्रशासन कब जागेगा?
संवाददाता गंगा शाह
नई टिहरी

