सेवा में,
श्रीमान नरेंद्र मोदी जी
माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार
नई दिल्ली
विषय-उत्तराखंड के मूलनिवासी शिल्पकार समाज के संरक्षण, संवर्धन एवं उत्थान के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने हेतु निवेदन
मान्यवर
जय भीम।
उत्तराखंड प्रदेश के मूलनिवासी शिल्पकार समाज के समग्र विकास को समर्पित शैलशिल्पी विकास संगठन हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड राज्य के मूलनिवासी शिल्पकार समाज की वर्तमान दयनीय स्थिति आपके संज्ञान में लाना चाहता है।
मान्यवर यह समाज सदियों से हिमालयी संस्कृति, कला और शिल्प कलाओं का आधार स्तंभ रहा है,लोहार, सुनार, ओढ, ताम्रकार,बढ़ई, सुनार, रूढ़िया, बाजगी, दर्जी , कोली आदि दर्जनों पारंपरिक शिल्पों के माध्यम से इन्होंने प्रदेश की आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना को आदिकाल से मजबूत किया है।
इतिहास गवाह है कि शिल्पकार समाज उत्तराखंड के प्राचीनतम निवासियों में से एक है, यह समाज वर्तमान में अनुसूचित जाति (शिल्पकार) से पहचाना जाता है, आज स्वतंत्र भारत में भी यह समाज अधिकांशतः भूमिहीनता, शोषण और उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
मान्यवर अगर केंद्र या राज्य सरकार कोई उचित सर्वे करे तो शिल्पकार वर्ग के अधिकांश परिवार आज भी बिना अपनी भूमि के दूसरों पर निर्भर रहकर जीवनयापन कर रहे हैं, उनके पारंपरिक शिल्पों का आधुनिकीकरण न होने, बाजार की पहुंच न होने और आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण नई पीढ़ी इन विरासती कलाओं को छोड़कर मजदूरी व पलायन को बाध्य है,वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।
मान्यवर उत्तराखंड प्रदेश के अधिकांश शिल्पकार परिवार भूमिहीन हैं या नाममात्र के भूमिधर है, वहीं दुर्भाग्य से समय-समय पर उनका जातिय, सामाजिक,आर्थिक शोषण भी जारी है।
शिल्पकार समाज की युवा पीढ़ी पारंपरिक कौशल में उचित भरणपोषण न होने की वजह से अपने शिल्पकारी के पेशे को छोड़ने के लिए मजबूर है।
मान्यवर शैलशिल्पी विकास संगठन आपका ध्यान आकर्षित करते हुए निवेदन करता है कि यदि तत्काल प्रदेश के मूलनिवासी शिल्पकार समाज का संरक्षण नहीं हुआ तो उत्तराखंड का ये मूलनिवासी समुदाय सांस्कृतिक एवं सामाजिक रूप से विलुप्त होने की कगार पर होगा, हमारी प्रदेश सरकार राज्य की डेमोग्राफी बदलाव को लेकर चिंता व्यक्त करती है, लेकिन प्रदेश के असली मूलनिवासी शिल्पकार वर्गों के परिवार मजबूरी में वर्षों से मानवीय संसाधनों, भूमिहीनता, बेरोजगारी की वजह से अपने गांवों को छोड़ चुके हैं, अगर राज्य से मूलनिवासी शिल्पकार वर्गों का पलायन यूं ही जारी रहा तो प्रदेश की ऐतिहासिक सांस्कृतिक पहचान का विलुप्त होना तय है।
मान्यवर, आपकी सरकार ने पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से देशभर के शिल्पकारों को सशक्त बनाने का सराहनीय कार्य किया है। उत्तराखंड में यह योजना व्यापक प्रचार प्रसार न होने के कारण पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पाई है।
मान्यवर शिल्पकार समाज की विशिष्ट समस्याओं विशेष रूप से जैसे भूमिहीनता, सामाजिक भेदभाव,आवास, शिक्षा, कौशल विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को ध्यान में रखते हुए और केंद्र एवं राज्य सरकार को इनके संवर्द्धन हेतु विशेष हस्तक्षेप की परम आवश्यकता है।
मान्यवर मैं शैलशिल्पी विकास संगठन की ओर से निम्नलिखित अनुरोध आपके समक्ष रखना चाहता हूँ।
1-भूमि सुधार एवं आवास– उत्तराखंड में भूमिहीन शिल्पकार परिवारों को वन भूमि/सरकारी भूमि आवंटित करने की विशेष योजना लागू की जाए।
2- कौशल संरक्षण एवं आर्थिक सशक्तिकरण– पारंपरिक शिल्पों (लकड़ी कारीगरी, धातु शिल्प, हस्तशिल्प आदि) के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र, ब्याज रहित ऋण, उचित बाजार की व्यवस्था।
3- शिक्षा एवं रोजगार– उच्च शिक्षा में विशेष प्रोत्साहन और सरकारी नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व के साथ पदोन्नति में आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
4-सांस्कृतिक संरक्षण– शिल्पकार विरासत को पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जोड़कर जीवंत रखा जाए।
5- केंद्र-राज्य समन्वय– उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर एक विशेष मूलनिवासी शिल्पकार उत्थान मिशन गठित किया जाए।
6- जातिय उत्पीड़न की घटनाओं में तत्काल कार्यवाही एवं आर्थिक सहायता – मान्यवर उत्तराखंड में शिल्पकार समाज जो अनुसूचित जाति की श्रेणी में आता है, इनके साथ जातिय उत्पीड़न की घटनाओं का इतिहास भी बहुत पुराना है, आज भी इनके साथ जाति उत्पीड़न की घटनाएं होती रहती हैं, और उन घटनाओं को दबाने के भी प्रयास देखे जाते हैं, आर्थिक सामाजिक रूप से कमजोर होने की वजह से उन्हें कानूनी न्याय पाने के लिए भी जूझना पड़ता है, अतः शिल्पकार समाज को जातिय उत्पीड़न से बचाने के लिए अतिरिक्त रूप से कुछ नवीन प्रावधान अमल में लाने की आवश्यकता है।
मान्यवर उत्तराखंड में अनुसूचित जाति के कार्मिकों को पहले पदोन्नति में आरक्षण प्राप्त था लेकिन वर्तमान में पदोन्नति में आरक्षण के प्रावधान को राज्य सरकार ने वर्ष 2012 से रोका हुआ है,जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार चाहे तो पदोन्नति में आरक्षण दे सकती है, महोदय वर्षों पूर्व पदोन्नति में आरक्षण दिए जाने या न दिए जाने को लेकर एवं इसके समाधान के लिए वर्ष 2012 में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा जी ने इरशाद हुसैन कमेटी का गठन किया गया था जिसे पदोन्नति में आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए अपनी रिपोर्ट देनी थी, लेकिन 16 वर्ष बीतने के बाद भी इरशाद हुसैन कमेटी की रिपोर्ट को अभी तक किसी भी राज्य सरकार ने सार्वजनिक नहीं किया, जिसकी मूल वजह यही प्रतीत होती है कि उक्त रिपोर्ट अनुसूचित जाति के कार्मिकों के पक्ष में है, महोदय उत्तराखंड में पदोन्नति में आरक्षण दिए जाना न्यायोचित है,क्योंकि अन्य राज्यों की अपेक्षा उत्तराखंड के अनुसूचित जाति के कार्मिकों की स्थितियां बिल्कुल भिन्न है।
मान्यवर उत्तराखंड के इतिहास को देखें तो शिल्पकार समाज में जन्में कर्मवीर जयानंद भारतीय, मुंशी हरिप्रसाद टम्टा, बलदेव सिंह आर्य जैसे कई महापुरुषों ने देश की स्वतंत्रता से लेकर सामाजिक सुधार के लिए महान त्याग एवं बलिदान दिए हैं, लेकिन दुर्भाग्य से शिल्पकार समाज में जन्मी इन महान विभूतियों को भी अभी तक की किसी भी सरकार ने वो मान-सम्मान नहीं दिया है जिसके वो हकदार हैं।
मान्यवर, हिमालय भारत की आत्मा है और शिल्पकार समाज इस हिमालय की प्राचीन कला-संस्कृति के वाहक हैं, यदि हम इन्हें खो देंगे तो हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों को ही खो देंगे,आपकी दूरदर्शी नेतृत्व में “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र को शिल्पकार समाज तक पूर्ण रूप से पहुंचाने का आपके पास यह एक विशेष अवसर है।
मान्यवर शैलशिल्पी विकास संगठन विश्वास करता है कि आप प्रदेश के लाखों मूलनिवासी शिल्पकार समाज के अस्तित्व से जुड़े इस गंभीर विषय पर मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यक्तिगत रूप से ध्यान देंगे और आवश्यक दिशा-निर्देश केंद्र एवं राज्य सरकार के माध्यम से जारी करेंगे, ऐसी हम अपेक्षा करते हैं ।
धन्यवाद।
भवदीय,
विकास कुमार आर्य
प्रदेश अध्यक्ष
शैलशिल्पी विकास संगठन मुख्यालय -नियर arto ऑफिस वार्ड नं 22 सिम्मलचौड़ कोटद्वार गढ़वाल (उत्तराखंड)

