सल्ट खुमाड़ आज तहसील सल्ट, खुमाड़ में आशा कार्यकर्ताओं द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन को समर्थन दिया गया। इस दौरान आशा बहनों की मांगों को जायज बताते हुए राज्य एवं केंद्र सरकार से उनकी मांगों पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई।
आशा कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करना, लंबे समय से कार्यरत आशा बहनों को नियमित करना तथा वर्ष 2021 में घोषित ₹11,500 मानदेय को लागू करना शामिल है। आशा बहनों का कहना है कि घोषणा के बावजूद अभी तक इसका पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाया है।
इस अवसर पर कहा गया कि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे घर-घर जाकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता तथा अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में अपनी भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान, वेतन और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलना गंभीर विषय है।
जब जनप्रतिनिधियों को जनता के मतदान के अधिकार के माध्यम से वेतन, भत्ते और पेंशन जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाली आशा बहनों को उनके श्रम के अनुरूप सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा क्यों नहीं मिलनी चाहिए? यह सवाल सरकार और व्यवस्था के सामने रखा गया।
आशा बहनों द्वारा अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को ज्ञापन दिया गया है। मांग की गई कि राज्य सरकार ज्ञापन में उठाए गए सभी विषयों पर तत्काल प्रभाव से विचार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे।
इस अवसर पर कहा गया कि आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं की अनदेखी केवल कर्मचारियों का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था से सीधे जुड़ा सवाल है। यदि स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारभूत कड़ी ही आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहेगी, तो आम जनमानस को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिल पाएंगी?
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पलायन रोकने और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए आशा बहनों की मांगों का समाधान जनहित और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में आवश्यक कदम है।
दीपा देवी, ललिता देवी ,लीला कमला, हेमा सरोजनी देवी दर्जनों आशा कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में सुनील टम्टा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तराखंड जनकल्याण समिति; दीपा देवी, ग्राम प्रधान मौलिक; तेजपाल, ग्राम प्रधान डढोली नंदकिशोर, सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रही।

