उल्लेखनीय है कि ‘युवा हल्ला बोल’ ने पढ़ाई-कमाई-दवाई के नारे पर देश भर में मुहिम छेड़ रखी है. आंदोलन के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद मिश्रा ने बताया कि ‘युवा हल्ला बोल’ की कोशिश है कि राजनीतिक पार्टियां भी चुनावों के दौरान इन्हीं मुद्दों पर सवाल जवाब और संवाद करे, न कि समाज को बांटने वाले जाति धर्म के मुद्दों पर. इसी के तहत आने वाले समय में उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए भी युवाओं के अभियान की तैयारी चल रही है.
‘युवा हल्ला बोल’ के महासचिव प्रशांत कमल ने बताया कि संगठन के हेल्पलाइन पर छात्र युवा लगातार संपर्क करके अपनी व्यथा और पीड़ा साझा कर रहे हैं. कई तरह की सरकारी भर्तियां हैं जिनमें या तो विज्ञापन नहीं निकलता, या परीक्षा नहीं होती, या धांधली गड़बड़ी हो जाती है, या परिणाम नहीं निकलता या फिर समय पर नियुक्ति नहीं मिलती. लेकिन अफसोस कि बात है कि सरकार इन प्रक्रियायों को सुधारने के प्रति गंभीर नहीं है. उल्टा रोज़गार के अवसरों में कटौती करने की लगातार कोशिशें हो रही हैं.
ज्ञात हो कि पिछले कुछ महीनों से राष्ट्रीय संपत्ति बेचे जाने के खिलाफ युवा हल्ला बोल ‘हम देश नहीं बिकने देंगे’ अभियान चला रहा है. PSUs, रेल, हाईवे और निजीकरण की नीतियों के वजह से बैंक कर्मी, कुली यूनियन के नेता और ऐसे तमाम लोग जो इससे पीड़ित हैं वे सभी इस आंदोलन में शामिल हैं. बैंक यूनियन के वरिष्ठ नेता सुनील कुमार का कहना है कि सरकारी बैंक ग्रामीण भारत की रीढ़ है. उसे बेचना देश की रीढ़ को तोड़ने के बराबर होगा. वहीं कुली यूनियन के नेता राम सुरेश करीब एक साल से निजीकरण के इस नीति के खिलाफ देशभर में स्टेशनों पर विरोध कर रहे हैं..
