रिंगणाबोडी (नागपुर) मूलनिवासी विद्यार्थी संघ (MVS) द्वारा नागपुर के रिंगणाबोडी में 27, 28 और 29 मई 2026 को तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय छात्र प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर से आए विद्यार्थियों को वैचारिक, सामाजिक और संगठनात्मक रूप से मजबूत बनाना रहा। शिविर में विभिन्न विषयों पर अनुभवी वक्ताओं ने विद्यार्थियों को संबोधित किया तथा सामाजिक आंदोलनों में युवाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत मूलनिवासी विद्यार्थी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमोल वज्जी के संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने संगठन के विजन और मिशन को स्पष्ट करते हुए विद्यार्थियों को सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मूलनिवासी समाज के विद्यार्थियों को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक चेतना और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए भी आगे आना होगा।
शिविर के दौरान “मूलनिवासी बहुजन आंदोलन में विद्यार्थियों की भूमिका”, “भारत में विद्यार्थी आंदोलनों की गतिशीलता”, “सामाजिक आंदोलनों में लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली एवं निर्णय प्रक्रिया”, “विद्यार्थी जीवन में शैक्षिक एवं आंदोलनात्मक कार्यों का संतुलन” जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए छात्र-छात्राओं ने भी अपने अनुभव साझा किए।
इस प्रशिक्षण शिविर का एक प्रमुख आकर्षण बामसेफ (BAMCEF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मोहिते का संबोधन रहा, जिसमें उन्होंने “मूलनिवासी विद्यार्थी संघ की संरचना, विस्तार नीतियां और रणनीतियां” विषय पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मूलनिवासी विद्यार्थी संघ केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि मूलनिवासी समाज के वैचारिक आंदोलन की मजबूत रीढ़ है।
संजय मोहिते जी ने अपने संबोधन में संगठन को भीड़ आधारित नहीं बल्कि कैडर आधारित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के “Educate, Agitate, Organize” सिद्धांत को विद्यार्थियों के जीवन का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत करियर निर्माण नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और संगठित करना भी होना चाहिए।
उन्होंने संगठन के विस्तार के लिए “Campus to Village” दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विद्यार्थी गांव-गांव जाकर वंचित समाज के बच्चों को शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक करें। साथ ही डिजिटल मीडिया और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से सही इतिहास और वैचारिक मुद्दों को युवाओं तक पहुँचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने, कॉलेजों और हॉस्टलों में स्टडी सर्कल बनाने तथा जमीनी स्तर की पत्रकारिता को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे सावित्रीबाई फुले, राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले, छत्रपति शाहू जी महाराज और डॉ. आंबेडकर के विचारों का अध्ययन कर सामाजिक न्याय के आंदोलन को नई दिशा दें।
कार्यक्रम के अंतिम दिन आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग और वैलेडिक्टरी सत्र में संगठन के भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के वैचारिक प्रशिक्षण शिविर युवाओं को नेतृत्व क्षमता विकसित करने और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

