अल्मोड़ा आज मोहन चौक में डबरा सौराल (घोड़ीधार) क्षेत्र में 21 वर्षीय महिला की बाघ के हमले में हुई दुःखद मृत्यु के विरोध में क्षेत्रवासियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा सांकेतिक चक्का जाम किया गया।
आंदोलनकारियों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ रही मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के कारण ग्रामीण भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं। सरकार की ओर से केवल मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा के लिए स्थायी और प्रभावी समाधान आवश्यक है। विधायक, सांसद, केंद्रीय राज्य मंत्री, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तत्काल स्थाई पॉलिसी बनाये अन्यथा होगा उग्र आंदोलन
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जिन क्षेत्रों में आदमखोर अथवा अत्यधिक आक्रामक वन्यजीवों का लगातार खतरा बना हुआ है, वहां कानून के अनुरूप त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही, वन विभाग द्वारा अधिकृत एवं प्रशिक्षित व्यक्तियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार मानव–वन्यजीव संघर्ष की समस्या के स्थायी समाधान हेतु तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाती और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं करती, तो पूरे उत्तराखंड में व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।
आंदोलन में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
नारायण रावत – पूर्व जिला पंचायत सदस्य
सुनील टम्टा – अध्यक्ष, धनगढ़ी पुल संघर्ष समिति
घनानन्द शर्मा – प्रदेश अध्यक्ष, सरपंच संगठन
बिशन दत्त शर्मा – ब्लॉक अध्यक्ष, कांग्रेस सल्ट
देव सिंह
देवेंद्र सिंह – पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी
आनंद राम – पूर्व सैनिक
मुनीश कुमार – समाजवादी लोकमंच
प्रेम राम – अध्यक्ष, वन अधिकार अधिनियम
ललित उप्रेती – किसान मोर्चा
चन्द्र सिंह रावत, महामंत्री धन गढ़ीपुल संघर्ष समिति
आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि मानव जीवन की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तत्काल ठोस, प्रभावी एवं स्थायी नीति लागू की जाए, जिससे भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

